श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 अक्टूबर 2026। सुबह-शाम मौसम में हल्की ठंडक घुलने लगी है, लेकिन श्रीडूंगरगढ़ और रीड़ी क्षेत्र के गांवों में चुनावी पारा लगातार चढ़ रहा है। खेतों की ढाणियों से लेकर गांवों की चौपालों तक अब चर्चा का केंद्र पंचायत चुनाव बन गए हैं। कहीं सरपंची का सपना देखने वाले संभावित प्रत्याशी ग्रामीणों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं, तो कहीं समर्थक बैठकर वोटों का हिसाब-किताब जोड़ने में जुटे हैं। गांव गुवाड़ की दुकानों पर चुनावी चर्चाएं हैं, घरों में बैठकों का दौर है। देर रात तक चलने वाली चौपालों में हार-जीत के संभावित समीकरण बनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर गांवों में चुनावी बिसात बिछने लगी है और हर दावेदार अपनी चालें चलने की तैयारी में जुटा है।
कहीं गुड़ बंट रहा, कहीं समर्थन जुटाने की कवायद
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरपंची के दावेदारों ने अब अपनी मंशा जाहिर करनी शुरू कर दी है। ग्रामीणों को एकत्र कर चुनाव लड़ने की घोषणा और गुड़ बांटने की परंपरागत कवायद के बीच गांवों में चुनावी चर्चाओं को नया रंग मिल रहा है। संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थक एक-एक वोट का हिसाब लगाने में जुटे हैं। किस मोहल्ले में किसका प्रभाव है, किस परिवार का रुख किधर है और पुराने समीकरणों में कहां बदलाव आ सकता है, इन सवालों पर लगातार मंथन हो रहा है। कई जगह पुराने गिले-शिकवे दूर करने और नाराज लोगों को मनाने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। सरपंची की इस जंग में अभी उम्मीदवारों के नाम पूरी तरह सामने नहीं आए हैं, लेकिन दावेदारी और समर्थन की दौड़ ने गांवों का राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है।
रिश्तेदारी से लेकर पुराने विरोध तक, हर समीकरण पर नजर
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्रामीण चुनावों की खासियत रही है कि यहां केवल राजनीतिक दलों का प्रभाव ही निर्णायक नहीं होता, बल्कि व्यक्तिगत संपर्क, रिश्तेदारी, सामाजिक समीकरण और गांव में किए गए काम भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशी हर उस कड़ी को मजबूत करने में जुटे हैं, जो मतदान के दिन उनके पक्ष में माहौल बना सके। समर्थकों की बैठकों में वोटों की संभावित संख्या का आकलन हो रहा है, तो दूसरी ओर विरोधियों के प्रभाव और उनकी तैयारियों पर भी नजर रखी जा रही है। चुनाव अभी दूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन दावेदारों की सक्रियता बता रही है कि इस बार गांवों में मुकाबले की जमीन पहले से तैयार की जा रही है।
युवाओं की कसौटी पर विकास, वादों का भी होगा हिसाब
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस बार ग्रामीण युवाओं के बीच भी गांव के विकास को लेकर चर्चाएं प्रमुखता से सामने आ रही हैं। सड़क, बिजली, पानी, सफाई, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर संभावित प्रत्याशियों से उम्मीदें जताई जा रही हैं। युवा वर्ग में ऐसी चर्चाएं हैं कि सरपंच चुनते समय केवल व्यक्तिगत संबंध ही नहीं, बल्कि गांव के विकास की सोच और काम करने की क्षमता भी देखी जानी चाहिए। ऐसे में दावेदारों के सामने केवल समर्थन जुटाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि गांव के विकास को लेकर अपना विजन और भरोसा भी प्रस्तुत करना होगा। चुनावी माहौल आगे बढ़ने के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि विकास के मुद्दे कितनी मजबूती से व्यक्तिगत और सामाजिक समीकरणों के बीच अपनी जगह बनाते हैं।
पंचायत समिति टिकटों पर भी सियासी शतरंज, बगावत का डर
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्राम पंचायतों में सरपंची की हलचल के साथ ही पंचायत समिति सदस्य पदों को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, श्रीडूंगरगढ़ और रीड़ी पंचायत समितियों के लिए सदस्य पदों के प्रत्याशियों के नाम लगभग तय किए जा चुके हैं। अब टिकट की घोषणा से पहले संभावित असंतोष को संभालने और बगावत की आशंका कम करने की कवायद चल रही है। टिकट की दौड़ में पीछे रह जाने वाले दावेदारों से बातचीत कर उन्हें मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि कुछ सीटों पर नाम तय करने को लेकर खींचतान जारी है। ऐसे में दलों के सामने प्रत्याशी चयन के साथ अपने कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को एकजुट रखने की चुनौती भी है। जिला परिषद प्रत्याशियों की तस्वीर 17 अक्टूबर को साफ होने के बाद अब पंचायत समिति के टिकटों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
4 नवंबर से नामांकन, 5 को मतदान और नतीजे।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, श्रीडूंगरगढ़ और रीड़ी की ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 4 नवंबर को नामांकन होगा। 5 नवंबर को मतदान के साथ ही मतगणना और सरपंच पद के परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके बाद 6 नवंबर, धनतेरस के दिन उपसरपंच चुनाव के साथ प्रक्रिया पूरी होगी। यानी आने वाले दिनों में गांवों की चुनावी हलचल और तेज होगी। अभी दावेदारों के बीच संपर्क, समर्थन और समीकरणों का दौर है, लेकिन नामांकन के बाद तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल गांवों में एक ही सवाल गूंज रहा है—किसके साथ कितने वोट हैं और किसकी रणनीति मतदान के दिन रंग लाएगी? चुनावी बिसात सज चुकी है, और गांव-गांव बनते नए समीकरणों पर हैं।
सरपंची की जंग में रिश्तों, समीकरणों और विकास के दावों की परीक्षा, पंचायत समिति टिकटों पर भी तेज हुई खींचतान
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