🚩श्री गणेशाय नम:🚩 

 

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।

वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।

योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।

*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

 

📜 आज का पंचांग 📜

 

☀ 20-Oct-2026

☀ Sri Dungargarh, India

 

🔅 तिथि नवमी 12:52 PM

🔅 नक्षत्र श्रवण 06:02 PM

🔅 करण कौलव, तैतिल 12:52 PM

🔅 पक्ष शुक्ल  

🔅 योग शूल 00:49 AM

🔅 वार मंगलवार  

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    

🔅 सूर्योदय 06:37 AM

🔅 चन्द्रोदय 02:31 PM

🔅 चन्द्र राशि मकर

🔅 सूर्यास्त 06:00 PM

🔅 चन्द्रास्त 01:38 AM

🔅 ऋतु शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष    

🔅 शक सम्वत 1948 पराभव

🔅 काली सम्वत 5127

🔅 दिन काल 11:23:18

🔅 विक्रम सम्वत 2083  

🔅 मास अमांत आश्विन

🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन

☀ शुभ और अशुभ समय    

☀ शुभ समय    

🔅 अभिजीत 11:55 AM 12:41 PM

☀ अशुभ समय    

🔅 दुष्टमुहूर्त 08:53 AM 09:39 AM

🔅 कंटक 07:22 AM 08:08 AM

🔅 यमघण्ट 10:24 AM 11:10 AM

🔅 राहु काल 03:09 PM 04:34 PM

🔅 कुलिक 01:26 PM 02:12 PM

🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 08:53 AM 09:39 AM

🔅 यमगण्ड 09:27 AM 10:53 AM

🔅 गुलिक काल 12:18 PM 01:44 PM

☀ दिशा शूल    

🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल    

☀ ताराबल    

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद    

☀ चन्द्रबल    

🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

 

📜 चोघडिया 📜

 

🔅 रोग 06:37 AM - 08:02 AM

🔅 उद्वेग 08:02 AM - 09:28 AM

🔅 चल 09:28 AM - 10:53 AM

🔅 लाभ 10:53 AM - 12:18 PM

🔅 अमृत 12:18 PM - 01:44 PM

🔅 काल 01:44 PM - 03:09 PM

🔅 शुभ 03:09 PM - 04:34 PM

🔅 रोग 04:34 PM - 06:00 PM

🔅 काल 06:00 PM - 07:34 PM

🔅 लाभ 07:34 PM - 09:09 PM

🔅 उद्वेग 09:09 PM - 10:44 PM

🔅 शुभ 10:44 PM - 00:18 AM

🔅 अमृत 00:18 AM - 01:53 AM

🔅 चल 01:53 AM - 03:28 AM

🔅 रोग 03:28 AM - 05:02 AM

🔅 काल 05:02 AM - 06:37 AM

 

📜 लग्न तालिका 📜

 

🔅 तुला चर  

शुरू: 06:29 AM समाप्त: 08:48 AM

 

🔅 वृश्चिक स्थिर  

शुरू: 08:48 AM समाप्त: 11:07 AM

 

🔅 धनु द्विस्वाभाव  

शुरू: 11:07 AM समाप्त: 01:11 PM

 

🔅 मकर चर  

शुरू: 01:11 PM समाप्त: 02:54 PM

 

🔅 कुम्भ स्थिर  

शुरू: 02:54 PM समाप्त: 04:22 PM

 

🔅 मीन द्विस्वाभाव  

शुरू: 04:22 PM समाप्त: 05:48 PM

 

🔅 मेष चर  

शुरू: 05:48 PM समाप्त: 07:24 PM

 

🔅 वृषभ स्थिर  

शुरू: 07:24 PM समाप्त: 09:20 PM

 

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव  

शुरू: 09:20 PM समाप्त: 11:35 PM

 

🔅 कर्क चर  

शुरू: 11:35 PM समाप्त: 01:55 AM

 

🔅 सिंह स्थिर  

शुरू: 01:55 AM समाप्त: 04:12 AM

 

🔅 कन्या द्विस्वाभाव  

शुरू: 04:12 AM समाप्त: 06:29 AM

 

🌼 आप सभी को महा नवमी, कन्या पूजन और विजयदशमी के पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

 

आज दोपहर 12.50 तक नवमी और उसके बाद दशमी तिथि विजयदशमी का पर्व प्रारम्भ हो जायेगा । नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं।

 

माता सिद्धिदात्री का स्वरूप बहुत सौम्य और मनोहारी है, मां की चार भुजाएं हैं। मां के एक हाथ में चक्र, एक हाथ में गदा, एक हाथ में कमल का फूल और एक हाथ में शंख सुशोभित है। माता सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है।

 

मां सिद्धिदात्री को खीर का भोग लगाया जाता है। अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि की नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।

 

ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः॥

 

आज कन्या पूजन के साथ ही नवरात्री के नौ दिनों के ब्रत का समापन हो जायेगा, अगर कोई व्यक्ति नवरात्री का ब्रत ना भी रख पाए तो भी हर हिन्दू को यथासंभव नवरात्री में अपने घर पर कन्या पूजन अवश्य ही करना चाहिए।

 

धर्म शास्त्रों में नवरात्री में कन्या पूजन का बहुत ही महत्त्व बताया गया है । कन्या पूजन, से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, पूर्ण श्रद्धा, हर्ष – उल्लास से नन्ही नन्ही कंजको को अपने घर में भोजन कराने, उन्हें अपनी श्रद्धा – सामर्थ्य अनुसार उपहार देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से समस्त पापो का नाश होता है, कुंडली के अशुभ ग्रहो से भी शुभ फल मिलने लगते है ।

 

शास्त्रों के अनुसार घर पर कन्या पूजन से समस्त वास्तु, ग्रह जनित दोष समाप्त हो जाते है घर में सुख – शांति और मनवांछित लाभ की प्राप्ति होगी है।

 

🌼 विजय दशमी 🌼

 

आज विजयदशमी / दशहरे का महापर्व है । आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को सत्य पर असत्य की विजय का पर्व दशहरे अर्थात विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।

 

यह पर्व श्रीराम की रावण पर एवं माता दुर्गा की शुंभ-निशुंभ आदि असुरों पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पर्व है ।

 

दशहरे के दिन भगवान श्रीराम, माँ अपराजिता देवी, शस्त्रों व शमी के वृक्ष की पूजा करने का विधान है।

 

मान्यता है कि विजयदशमी के दिन ही कुबेर देव ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के लिए शमी के वृक्ष के पत्तों को सोने का बना दिया था। उसी समय से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है।

 

इस दिन संध्या के समय शमी के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से सुख – समृद्धि, युद्ध और मुक़दमो में विजय मिलती है शत्रुओं का भय समाप्त होता है, आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है ।

 

विजयदशमी के दिन शास्त्रों की पूजा का भी विधान बहुत ही प्राचीन समय से है, कहते हैं कि इस दिन शास्त्रों की पूजा करने से शत्रु परास्त होते है, व्यक्ति की सभी जगह पर विजय होती है ।

 

 

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री