श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 अक्टूबर 2026। पंचायती राज चुनावों की आहट के साथ ही गांवों में हथाइयों और राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सरपंच चुनाव को लेकर संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ रही है, वहीं राजनीतिक दलों के सामने भी ग्रामीण स्तर पर अपना जनाधार बनाए रखने की चुनौती है। कहीं एक ही परिवार के अलग-अलग धड़े अलग-अलग दलों के साथ नजर आ रहे हैं, तो कहीं समर्थक कांग्रेस, भाजपा, माकपा और आरएलपी का दामन थाम रहे हैं। ऐसे में गांवों के राजनीतिक समीकरण लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कई गांवों में मुकाबले को लेकर चर्चाएं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांवों में सरपंच प्रत्याशियों के बीच कड़े मुकाबले की संभावनाओं पर चर्चाएं होने लगी हैं। मोमासर, रीड़ी, उदरासर व बींझासर में चुनावी मुकाबले को लेकर विशेष चर्चा है। इसके अलावा गुसाईंसर बड़ा, आड़सर, तोलियासर, जेतासर, दुसारणा पंडरिकजी, पुंदलसर, सत्तासर, जोधासर, बेनीसर, सूडसर, देराजसर, कोटासर, लिखमीसर दिखणादा, सांवतसर और जाखासर सहित अनेक गांवों के सरपंच चुनाव भी चर्चाओं में हैं। ग्रामीण स्तर पर प्रत्याशियों के समर्थन, परिवारों की भूमिका और स्थानीय समीकरणों को लेकर आकलन किए जा रहे हैं।
पंचायत समिति चुनावों पर भी पड़ेगा असर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरपंच चुनावों का असर पंचायत समिति सदस्य के चुनावों पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण राजनीति में सरपंच पद के प्रत्याशियों का स्थानीय प्रभाव और उनके समर्थकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी कारण गांवों में एक-एक वोट को लेकर गुणा-भाग शुरू हो गया है। कई ग्राम पंचायतों में मुकाबला रोचक होने की चर्चाएं हैं और प्रत्याशियों को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाना होगा।
सोशल मीडिया पर दावेदारी की पोस्टें हटने लगीं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनावों की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर भी सरपंच पद की दावेदारी जताने वाली पोस्टें दिखाई देने लगी थीं। कुछ यूजर्स ने चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए अपनी सक्रियता प्रदर्शित की, लेकिन अब ऐसी कुछ पोस्टें हटती नजर आ रही हैं। इससे ग्रामीण चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका और वास्तविक जनसमर्थन के बीच अंतर को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीण राजनीति में व्यक्तिगत संपर्क, परिवारों की भूमिका, स्थानीय मुद्दों और लंबे समय से सक्रिय लोगों का प्रभाव भी महत्वपूर्ण रहता है। ऐसे में चुनावी मुकाबले का वास्तविक स्वरूप प्रत्याशियों के मैदान में उतरने और मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता से ही सामने आएगा। फिलहाल गांवों की चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक पंचायत चुनावों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।