September 26, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 सितंबर 2026। पढें आज के दिन का पूरा पंचांग पंडित विष्णुदत्त शास्त्री के साथ।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀ 26-Sep-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि पूर्णिमा 10:20 PM
🔅 नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद 11:32 AM
🔅 करण विष्टि, बव 10:48 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग गण्ड 01:17 PM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:23 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:07 PM
🔅 चन्द्र राशि मीन
🔅 सूर्यास्त 06:26 PM
🔅 चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:02:30
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:01 PM 12:49 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:23 AM 07:12 AM
🔅 कंटक 12:01 PM 12:49 PM
🔅 यमघण्ट 03:13 PM 04:01 PM
🔅 राहु काल 09:24 AM 10:54 AM
🔅 कुलिक 07:12 AM 08:00 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 01:37 PM 02:25 PM
🔅 यमगण्ड 01:55 PM 03:25 PM
🔅 गुलिक काल 06:23 AM 07:54 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 काल 06:24 AM – 07:54 AM
🔅 शुभ 07:54 AM – 09:24 AM
🔅 रोग 09:24 AM – 10:55 AM
🔅 उद्वेग 10:55 AM – 12:25 PM
🔅 चल 12:25 PM – 01:55 PM
🔅 लाभ 01:55 PM – 03:25 PM
🔅 अमृत 03:25 PM – 04:56 PM
🔅 काल 04:56 PM – 06:26 PM
🔅 लाभ 06:26 PM – 07:56 PM
🔅 उद्वेग 07:56 PM – 09:25 PM
🔅 शुभ 09:25 PM – 10:55 PM
🔅 अमृत 10:55 PM – 00:25 AM
🔅 चल 00:25 AM – 01:55 AM
🔅 रोग 01:55 AM – 03:24 AM
🔅 काल 03:24 AM – 04:54 AM
🔅 लाभ 04:54 AM – 06:24 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:47 AM समाप्त: 08:03 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 08:03 AM समाप्त: 10:23 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:23 AM समाप्त: 12:41 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 12:41 PM समाप्त: 02:46 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 02:46 PM समाप्त: 04:29 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 04:29 PM समाप्त: 05:57 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:57 PM समाप्त: 07:23 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 07:23 PM समाप्त: 08:59 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 08:59 PM समाप्त: 10:55 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:55 PM समाप्त: 01:10 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 01:10 AM समाप्त: 03:30 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:30 AM समाप्त: 05:47 AM

2026 में पितृ पक्ष (श्राद्ध) 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, यह पावन पर्व पूरे 16 दिनों तक मनाया जाएगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

श्राद्ध ( पितृ ) पक्ष का महत्व

सनातन धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पितर अपने लोक से पृथ्वी के निकट आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा श्रद्धापूर्वक स्मरण को ग्रहण करते हैं। इसी कारण पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए विशेष काल माना गया है।

श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, सनातन धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष समय माना गया है। इस अवधि में परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करके उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन तथा दान-पुण्य करता है।
श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि यह स्मरण कराता है कि हम अपने पूर्वजों के जीवन, संस्कार और योगदान की परंपरा का हिस्सा हैं। पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना सनातन परंपरा में पारिवारिक एवं धार्मिक कर्तव्य माना गया है।

“श्रद्धया दीयते इति श्राद्धम्” — अर्थात् श्रद्धा से जो अर्पित किया जाए, वह श्राद्ध है।

श्राद्ध पक्ष में क्या किया जाता है?

* पितरों की मृत्यु-तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म।
* तिल और जल से पितृ तर्पण।
* पितरों के निमित्त पिंडदान।
* ब्राह्मण, साधु अथवा जरूरतमंद को भोजन एवं दान।
* गौ सेवा एवं अन्य पुण्य कार्य।
* पितरों का स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।

पितरों का जीवन में महत्व एवं पितृ-श्राद्ध क्यों आवश्यक है?

सनातन परंपरा में पितरों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा पूर्वजों ने केवल हमें जन्म देने में ही नहीं, बल्कि परिवार की परंपरा, संस्कार, ज्ञान और जीवन-मूल्यों को आगे बढ़ाने में भी योगदान दिया है। इसलिए पितरों का स्मरण वास्तव में अपनी जड़ों और अपनी परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।

पितरों का हमारे जीवन में महत्व

हमारा अस्तित्व एक लंबी पीढ़ी-परंपरा का परिणाम है। जिस परिवार, संस्कार और संस्कृति में हम आज जीवन जी रहे हैं, उसमें हमारे पूर्वजों का योगदान रहा है।
इसलिए पितृ-स्मरण हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और कृतज्ञता का भाव पैदा करता है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री