श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 अक्टूबर 2026। श्री गणेशाय नम:🚩 

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀️ 18-Oct-2026
☀️ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि  सप्तमी  08:29 AM
🔅 नक्षत्र  पूर्वाषाढ़ा  12:49 PM
🔅 करण  वणिज, विष्टि  08:29 AM
🔅 पक्ष  शुक्ल  
🔅 योग  सुकर्मा  11:56 PM
🔅 वार  रविवार  
☀️ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    
🔅 सूर्योदय    06:35 AM
🔅 चन्द्रोदय    01:18 PM
🔅 चन्द्र राशि    07:33 PM
🔅 सूर्यास्त    06:02 PM
🔅 चन्द्रास्त    11:45 PM
🔅 ऋतु    शरद
☀️ हिन्दू मास एवं वर्ष    
🔅 शक सम्वत  1948  पराभव
🔅 काली सम्वत    5127
🔅 दिन काल    11:26:28
🔅 विक्रम सम्वत  2083  
🔅 मास अमांत    आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत    आश्विन
☀️ शुभ और अशुभ समय    
☀️ शुभ समय    
🔅 अभिजीत  11:56 AM  12:41 PM
☀️ अशुभ समय    
🔅 दुष्टमुहूर्त  04:30 PM  05:16 PM
🔅 कंटक  10:24 AM  11:10 AM
🔅 यमघण्ट  01:27 PM  02:13 PM
🔅 राहु काल  04:36 PM  06:02 PM
🔅 कुलिक  04:30 PM  05:16 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम  11:56 AM  12:41 PM
🔅 यमगण्ड  12:19 PM  01:44 PM
🔅 गुलिक काल  03:10 PM  04:36 PM
☀️ दिशा शूल    
🔅 दिशा शूल    पश्चिम
☀️ चन्द्रबल और ताराबल    
☀️ ताराबल    
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद    
☀️ चन्द्रबल    
🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 उद्वेग  06:36 AM -   08:01 AM
🔅 चल  08:01 AM -   09:27 AM
🔅 लाभ  09:27 AM -   10:53 AM
🔅 अमृत  10:53 AM -   12:19 PM
🔅 काल  12:19 PM -   01:44 PM
🔅 शुभ  01:44 PM -   03:10 PM
🔅 रोग  03:10 PM -   04:36 PM
🔅 उद्वेग  04:36 PM -   06:02 PM
🔅 शुभ  06:02 PM -   07:36 PM
🔅 अमृत  07:36 PM -   09:10 PM
🔅 चल  09:10 PM -   10:44 PM
🔅 रोग  10:44 PM -    00:19 AM
🔅 काल   00:19 AM -    01:53 AM
🔅 लाभ   01:53 AM -    03:27 AM
🔅 उद्वेग   03:27 AM -    05:01 AM
🔅 शुभ   05:01 AM -    06:36 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव  
शुरू: 04:20 AM    समाप्त: 06:36 AM

🔅 तुला  चर  
शुरू: 06:36 AM    समाप्त: 08:56 AM

🔅 वृश्चिक  स्थिर  
शुरू: 08:56 AM    समाप्त: 11:14 AM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव  
शुरू: 11:14 AM    समाप्त: 01:19 PM

🔅 मकर  चर  
शुरू: 01:19 PM    समाप्त: 03:02 PM

🔅 कुम्भ  स्थिर  
शुरू: 03:02 PM    समाप्त: 04:30 PM

🔅 मीन  द्विस्वाभाव  
शुरू: 04:30 PM    समाप्त: 05:56 PM

🔅 मेष  चर  
शुरू: 05:56 PM    समाप्त: 07:32 PM

🔅 वृषभ  स्थिर  
शुरू: 07:32 PM    समाप्त: 09:28 PM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव  
शुरू: 09:28 PM    समाप्त: 11:43 PM

🔅 कर्क  चर  
शुरू: 11:43 PM    समाप्त:  02:03 AM

🔅 सिंह  स्थिर  
शुरू:  02:03 AM    समाप्त:  04:20 AM

🌼 आप सभी को नवरात्री का सातवां और आठवां दिन, अष्टमी में कन्या पूजन की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ कालरात्रि, जय माँ महा गौरी,

आज सुबह 08.28 AM से अष्टमी तिथि लग जाएगी, नवरात्री का आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी का दिन है। नवरात्री के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है ।

इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। कोई भी संकट, दुःख उसके पास भी नहीं आता है । मां गौरी ममता की मूर्ति कही जाती हैं जो अपने भक्तों को अपने पुत्र समान प्रेम करती हैं।

मां महागौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है।

इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इनके सभी वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है और इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।

महागौरी का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। इन की चार भुजाएँ हैं, इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं।

अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी तिथि को माँ गौरी को दूध से बने नैवेद्य एवं नारियल का भोग लगाएं।

माँ गौरी की आराधना से सभी पाप नष्ट हो जाते है एवं धन, यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है । ये धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।

नवरात्री की अष्टमी के दिन मां गौरी की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।

“ॐ महा गौरी देव्यै नम:”

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री