






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 अक्टूबर 2026। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 11-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि प्रतिपदा 09:32 PM
🔅 नक्षत्र चित्रा 10:32 PM
🔅 करण किन्स्तुघ्ना, बव 09:22 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग वैधृति 09:04 PM
🔅 वार रविवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:31 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:59 AM
🔅 चन्द्र राशि 10:04 AM
🔅 सूर्यास्त 06:09 PM
🔅 चन्द्रास्त 06:18 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:37:44
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:57 AM 12:43 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:36 PM 05:22 PM
🔅 कंटक 10:24 AM 11:10 AM
🔅 यमघण्ट 01:30 PM 02:16 PM
🔅 राहु काल 04:42 PM 06:09 PM
🔅 कुलिक 04:36 PM 05:22 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 11:57 AM 12:43 PM
🔅 यमगण्ड 12:20 PM 01:47 PM
🔅 गुलिक काल 03:15 PM 04:42 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 उद्वेग 06:32 AM – 07:59 AM
🔅 चल 07:59 AM – 09:26 AM
🔅 लाभ 09:26 AM – 10:53 AM
🔅 अमृत 10:53 AM – 12:20 PM
🔅 काल 12:20 PM – 01:47 PM
🔅 शुभ 01:47 PM – 03:15 PM
🔅 रोग 03:15 PM – 04:42 PM
🔅 उद्वेग 04:42 PM – 06:09 PM
🔅 शुभ 06:09 PM – 07:42 PM
🔅 अमृत 07:42 PM – 09:15 PM
🔅 चल 09:15 PM – 10:47 PM
🔅 रोग 10:47 PM – 00:20 AM
🔅 काल 00:20 AM – 01:53 AM
🔅 लाभ 01:53 AM – 03:26 AM
🔅 उद्वेग 03:26 AM – 04:59 AM
🔅 शुभ 04:59 AM – 06:32 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:48 AM समाप्त: 07:04 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 07:04 AM समाप्त: 09:23 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 09:23 AM समाप्त: 11:42 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:42 AM समाप्त: 01:46 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 01:46 PM समाप्त: 03:29 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:29 PM समाप्त: 04:58 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:58 PM समाप्त: 06:23 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 06:23 PM समाप्त: 08:00 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 08:00 PM समाप्त: 09:56 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:56 PM समाप्त: 00:11 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 00:11 AM समाप्त: 02:31 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 02:31 AM समाप्त: 04:48 AM
🌼 सभी सनातनियों को शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ
शारदीय नवरात्रि 2026
हे माँ आदि शक्ति आप अपने भक्तो पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखते हुए उनकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करे ।
🌼 घट स्थापना 🌼
नवरात्री में कलश स्थापना का बहुत महत्व है। नवरात्रि की प्रतिपदा के दिन सभी भक्त श्रद्धानुसार अपने घर / कारोबार में घट अर्थात कलश स्थापना करते हैं।
शास्त्रो के अनुसार शुभ मुहूर्त एवं विधि विधान से नवरात्र में कलश स्थापना करने से माँ अति प्रसन्न होती है।
नवरात्र में कलश स्थापना कैसे करें ?
* नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घर के मंदिर में अथवा घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीले वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर माँ दुर्गा की मूर्ती या तस्वीर को स्थापित करना चाहिए।
* प्रतिपदा के दिन सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के लिए सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें, इस पात्र को स्थापित करने से पहले इसके नीचे सप्तधान्य बिखेर दें I
फिर इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाकर फिर एक जौ की परत बिछाएं।
इसके ऊपर फिर मिट्टी की और उसके बाद एक परत जौ की बिछाएं ततपश्चात उसको जल से अच्छी तरह से गीला करके उसके पश्चात उसपर सोने, तांबे अथवा मिट्टी के कलश की विधिपूर्वक स्थापित करें।
* (इस बात का विशेष ध्यान दे कि जो कलश आप स्थापित कर रहे है वह मिट्टी, पीतल , तांबा, चाँदी या सोने का होना चाहिए। लेकिन लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग बिलकुल भी नहीं करे ।)
* कलश को गंगा जल से भरकर उसमें पंचरत्न, रोली, मीठा, चाँदी का सिक्का डालकर उसपर आम के पत्ते लगाकर कलश को ढक्कन से ढक दें।
घट स्थापना मुहूर्त :
* फिर उस ढक्कन में अक्षत भरकर उसपर जटा वाला नारियल किसी लाल चुनरी में कलावा से लपेटकर उस पर रख दें । कलश के कंठ पर मोली अवश्य ही बाँध दें।
* इस बात का विशेष ध्यान दे की कलश पर रखे नारियल का मुँह किस ओर हो…….
* कलश के ऊपर जो नारियल रखा जाता है उसे भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है,
* नारियल का मुँह उस तरफ होता है, जिस ओर से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है। शास्त्रनुसार नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में बढ़ते है।
नारियल का मुख ऊपर की तरफ रहने से रोग प्रबल होते हैं, नारियल का मुख पूर्व की तरफ रखने से धन की हानि होती है।
लेकिन नारियल का मुख साधक की तरफ रहने से शुभ फलो की प्राप्ति होती है,
इसलिए नारियल का मुँह सदैव भक्त की तरफ ही होना चाहिए।
इसके पश्चात् सभी देवी देवताओं का कलश में आवाहन करें। “हे माँ दुर्गा और सभी पूज्य देवी देवता आप सभी नवरात्र Navratri के इन नौ दिनों के लिए हमारे यहाँ पर पधारें।” इसके पश्चात् दीपक , धूप, अगरबत्ती जलाकर माँ की तस्वीर एवं कलश का पूजन करें। फिर माँ को फूल, माला, लौंग इलायची, नैवेद्य,पंचमेवा, इत्र, शहद, फल मिठाई आदि भी अवश्य ही अर्पित करें ।
* नवरात्र के दौरान यदि हो सके तो कलश के सामने अखंड दीप भी जलाएं।
यदि घी का दीपक लगाएं तो ध्यान रखें कि उसे माता की मूर्ति के दायीं ओर रखें और यदि तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे मूर्ति के बायीं ओर रखें।
दीपक की स्थापना करते समय ध्यान रहे की दीपक के नीचे “चावल” अथवा “सप्तधान्य” रखकर उसके ऊपर दीपक को स्थापित करें ।
* नवरात्रे की अष्टमी या नवमी के दिन दस साल से कम उम्र की नौ कन्याओं और एक लडके को भोजन करा कर उन्हें दक्षिणा उपहार देकर उन कंजकों से उगे हुए जौ के बीच स्थापित कलश को अपने स्थान से हिलवा देना चाहिए, उसके बाद कुछ जौं को जड सहित उखाडकर घर की तिजौरी या धन स्थान पर रखना चाहिए इससे घर में स्थाई सुख समृ्द्धि का वास होता है ।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री





