Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 12, 2026
3
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 अक्टूबर 2026। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 12-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि द्वितीया 10:14 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति 11:52 PM
🔅 करण बालव, कौलव 09:49 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग विश्कुम्भ 08:31 PM
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:32 AM
🔅 चन्द्रोदय 07:58 AM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 सूर्यास्त 06:08 PM
🔅 चन्द्रास्त 06:53 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:36:08
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:57 AM 12:43 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:43 PM 01:29 PM
🔅 कंटक 08:51 AM 09:37 AM
🔅 यमघण्ट 11:57 AM 12:43 PM
🔅 राहु काल 07:59 AM 09:26 AM
🔅 कुलिक 03:02 PM 03:49 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 10:24 AM 11:10 AM
🔅 यमगण्ड 10:53 AM 12:20 PM
🔅 गुलिक काल 01:47 PM 03:14 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅 अमृत 06:32 AM – 07:59 AM
🔅 काल 07:59 AM – 09:26 AM
🔅 शुभ 09:26 AM – 10:53 AM
🔅 रोग 10:53 AM – 12:20 PM
🔅 उद्वेग 12:20 PM – 01:47 PM
🔅 चल 01:47 PM – 03:14 PM
🔅 लाभ 03:14 PM – 04:41 PM
🔅 अमृत 04:41 PM – 06:08 PM
🔅 चल 06:08 PM – 07:41 PM
🔅 रोग 07:41 PM – 09:14 PM
🔅 काल 09:14 PM – 10:47 PM
🔅 लाभ 10:47 PM – 00:20 AM
🔅 उद्वेग 00:20 AM – 01:53 AM
🔅 शुभ 01:53 AM – 03:26 AM
🔅 अमृत 03:26 AM – 04:59 AM
🔅 चल 04:59 AM – 06:32 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:44 AM समाप्त: 07:00 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 07:00 AM समाप्त: 09:19 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 09:19 AM समाप्त: 11:38 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:38 AM समाप्त: 01:43 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 01:43 PM समाप्त: 03:26 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:26 PM समाप्त: 04:54 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:54 PM समाप्त: 06:20 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 06:20 PM समाप्त: 07:56 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:56 PM समाप्त: 09:52 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:52 PM समाप्त: 00:07 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 00:07 AM समाप्त: 02:27 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 02:27 AM समाप्त: 04:44 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

🌼 शारद नवरात्रि 🌼
द्वितीय दिवस
माँ ब्रह्मचारिणी पूजन
आज नवरात्री का दूसरा दिन है । नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। अर्थात ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप, त्याग और वैराग्य का आचरण करने वाली।
इन्होंने भगवान भोलेनाथ जी को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।
इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल सुशोभित है।
मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी परेशानियां भी खत्म होती हैं, समस्त रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से भक्तो को सर्व सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन शादी ना हुई हो।
अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
अर्थात : देवी माता ब्रह्मचारिणी को मेरा नमन है।
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
माँ ब्रह्मचारिणी अतिसौम्य, क्रोध रहित और तुरंत वरदान देने वाली देवी मानी गयी है।
नवरात्री के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग चढ़ाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से दीर्घ आयु का वरदान मिलता है।
मां ब्रह्मचारिणी पीला और सफ़ेद रंग बहुत प्रिय है इसलिए माता की पूजा में पीले अथवा सफ़ेद रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। साथ ही पीले, सफ़ेद रंग के फूल भी अर्पित करने चाहिए।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री