June 22, 2024

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अनशन को संबोधित करती सरपंच प्रियंका सिहाग।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 जुलाई 2019। जनता की सेवा करने के बड़े बड़े वादे एवं दावे करने वाले श्रीडूंगरगढ़ से लेकर जयपुर तक के प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के चेहरों पर शनिवार को उस समय कालिख़ पुत गई जब अपने चिकित्सा अधिकार के लिए गांव बरजांगसर की महिलाएं सरपंच प्रियंका सिहाग की अगुवाई में आमरण अनशन पर बैठ गई। शर्म की बात रही कि लंबे समय से सैंकड़ों बार मांग उठाने, पंचायत द्वारा चिकित्सा विभाग को भूमि आंवटित करने के बाद भी भवन निर्माण हेतु गंभीर नहीं होने एवं समस्त मापदंडों को पूरा करने के बाद भी सौतेला व्यवहार करने से आक्रोशित बरजांगसर के ग्रामीणों ने 15 दिन पहले गांव की इस सामूहिक मांग को पूरा नहीं करने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी थी एवं इस संबध में उपखण्ड अधिकारी से लेकर कलेक्टर तक, सीएमएचओ से लेकर चिकित्सा मंत्री तक, विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक एवं कांग्रेस प्रदेश महासचिव से लेकर प्रदेशाध्यक्ष तक अपनी बात पहुंचाई थी लेकिन किसी ने भी बरजांगसर के ग्रामीणों की आवाज को नहीं सुना व मजबूरन ग्रामीणों को शनिवार से अपना आमरण अनशन शुरू करना पड़ा। उपस्वास्थ्य केन्द्र संघर्ष समिति अध्यक्षा चतर कंवर ने बताया कि शनिवार को सरपंच प्रियंका सिहाग, गांव के जिम्मेवार नागरिक नेमाराम, रामनिवास ने आमरण अनशन शुरू किया एवं 150 से अधिक महिलाओं एवं पुरूषों ने इनके सर्मथन में एकदिवसीय अनशन किया। इस दौरान अनशन स्थल पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सरपंच प्रियंका सिहाग ने इस संघर्ष को गांव के सम्मान का संघर्ष बताया एवं एकजुट होकर गूंगे बहरे हो चुके प्रशासन को अपने हक की आवाज सुनाने के लिए साथ देने की अपील की। अनशन को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी संबोधित किया एवं एकजुटता रखने की अपील की। गांधीवादी तरीके से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे बरजांगसर के ग्रामीण पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन चुके है एवं पूरे क्षेत्र में चिकित्सा विभाग, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की कुंभकर्णी नीदं को जगाने के लिए बरजांगसर के ग्रामीणों के प्रयास को सराहा जा रहा है। शनिवार को अनशन के पहले दिन आरएलपी नेता दानाराम घिंटाला, छात्र नेता रामनिवास बेनीवाल, विनोद गोदारा, ओमप्रकाश बाना, जितेन्द्र भादू, सुरेन्द्र सहू, कैलाश सारण आदि भी पहुंचें एवं अनशन को सर्मथन दिया। वहीं दूसरी और कांग्रेस जिला सचिव पूनमचंद नैण ने भी ग्रामीणों की मांग को उचित बताते हुए अनशन का सर्मथन किया है एवं कांग्रेस प्रदेश महासचिव मंगलाराम गोदारा, चिकित्सा मंत्री ड़ा रघू शर्मा को पत्र भेज कर चिकित्सा विभाग के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने एवं ग्रामीणों की मांग शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्राम देवता का पूजन कर किया आमरण अनशन शुरू, ग्रामीणों में चिकित्सा विभाग के खिलाफ रोष।

गंभीर नहीं हुआ प्रशासन, की खानापूर्ति।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कई बार ज्ञापन, 15 दिनों का अल्टीमेटम, जनसुनवाई में प्रकरण उठाने, आमरण अनशन से पूर्व अंतिम चेतावनी सहित सैंकड़ों बार बरजांगसर के ग्रामीणों ने अपनी बात प्रशासन एवं सरकार तक पहुंचाई। प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लेने के कारण मजबुरन शनिवार से बरजांगसर गांव के कई घरों में चूल्हें नहीं जले। क्षेत्र में प्रशासनिक अमला इतना कमजोर हो चुका है कि ग्रामीणों के अनशन से पूर्व एक बार भी किसी समक्ष अधिकारी ने वार्ता, समझाईश, आश्वासन आदि का प्रयास तक नहीं किया। और प्रशासन द्वारा जन समस्याओं एवं जन आंदोलनों को हल्के में लेने का प्रमाण तो शनिवार को उस समय मिला जब सरपंच सहित तीन ग्रामीणों के आमरण अनशन एवं सैंकड़ों लोगों के एकदिवसीय अनशन के बाद भी प्रशासन गांव नहीं पहुंचा। प्रशासन द्वारा केवल हल्का पटवारी को मौके पर भेज कर रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन द्वारा गंभीरता से नहीं लेने पर ग्रामीणों में जबरदस्त रोष व्याप्त है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अनशन स्थल पर सर्मथन देने पहुंचें ग्रामीणों का, नेताओं का  तिलक लगाकर स्वागत किया।

धार्मिक मान्यताओं को किया पूरा, संस्कारों के साथ घूंघट की ओट से बोली महिलाएं हक तो हमारा लेकर रहेगें।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव बरजांगसर में ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा आमरण अनशन इसलिए विशेष बन गया है कि पूरे क्षेत्र में पहली बार महिलाएं अपने हक के लिए घरों से बाहर निकली है। अपने हक की आवाज को अपने संस्कारों के साथ उठाने की शानदार तस्वीर बरजांगसर के ग्रामीणों के आंदोलन में नजर आ रही है। शनिवार को भी अनशन शुरू करने से पूर्व व पूरे गांव के मुख्य पीपल गट्‌टे पर ग्राम देवता का पूजन किया एवं अपना आंदोलन सफल होने की मन्नतें मांगी। अनशनस्थल पर सैंकडों की संख्या में महिलांए घूंघट  की ओट से अपने हक की आवाज को बुलंद कर रही है। इन महिलाओं का कहना है कि चिकित्सा सेवा हमारा अधिकार है एवं अब हम हमारा अधिकार लेकर रहेगें। गांव में उपस्वास्थ्य केन्द्र का भवन नहीं होने के कारण हमारी बहू बेटियों को टीकाकरण जैसी  छोटी सी चिकित्सा सेवा के लिए घंटों धूप में खड़े रहना पड़ता है। संस्थागत प्रसव नहीं होने से हर साल गांव की सैंकड़ों बहू-बेटियों व नवजात शिशुओं की जान खतरें में होती है। ऐसे में अब यह अन्याय और सहन नहीं करेगें।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। घूंघट की ओट से हक की आवाज बुलंद करती गांव बरजांगसर की महिलाएं।

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