March 1, 2024

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 जून 2021। नटराजासन का नाम भगवान शिव के नाम पर रखा गया है जो नृत्य के देव भी माने जाते हैं। वैसे तो नटराजासन के कई प्रकार है लेकिन यहां पर जिस नटराजासन की व्याख्या की जा रही है वह नटराजासन की एक विकसित अवस्था है। इस आसन को सबके लिए अभ्यास करना आसान नहीं है। लेकिन प्रैक्टिस के साथ इस पर आप जीत पा सकते हैं। नटराजासन को एडवांस्ड योगाभ्यास के वर्ग में रखा गया है।

नटराजासन की विधि
शुरुवाती दौड़ में इस आसन को करना आसान नहीं होगा। इसके लिए आपको प्रैक्टिस की जरूरत है। लेकिन कुछ दिन के अभ्यास के बाद इसे आप अच्छी तरह कर सकते हैं।
1.सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं।
2.अब आप अपने दाएं पैर को उठाएं, उसे घुटने से मोड़ें तथा जितना संभव हो पीठ के पीछे ले जाएं।
3.दोनों बांहों को सामने से ऊपर उठाएं, फिर इन्हें पीछे ले जाएं।
4.अब आप बाएं पांव पर खड़े रहते हुए और अपने संतुलन को बनाते हुए दाएं पैर को दोनों हाथों से पकड़कर जितना संभव हो सिर के ऊपर ले जाएं।
5.ध्यान रहे आपका सिर स्थिर और दृष्टि सामने हो।
6.जहाँ तक हो सके इस अवस्था को बनाये रखें और फिर धीरे धीरे आरंभिक स्थिति में आ जाएं।
यह आधा चक्र हुआ।
7.इसी तरह से आप बायें पैर से भी इसे करें।
अब एक चक्र पूरा हुआ।
इस तरह से आप 5 से 7 चक्र करें।

लाभ
1. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न हिस्सों से चर्बी को गलाने में मदद मिलती है।
2.जांघों का मोटापा कम करने के लिए लाभदायक है।
3. इसका अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ती है।
4.इससे याददाश्त में इजाफा होता है।
5.इस आसन को करने से आपके पैर मजबूत होते हैं।
6.इसके प्रैक्टिस से आपकी बाहें मजबूत एवं शुडौल बनती है।
7. इस आसन के अभ्यास से आप कंधों एवं मस्तिष्क में कैल्शियम जमा होना रोक सकते हैं।
8.यह शरीर के संतुलन को सुधारता है।
9.यह आसन घुटने के लिए बहुत ही उम्दा आसान है। इसके नियमित अभ्यास से आप अपने घुटने को मजबूत करने के साथ साथ इसके दर्द को भी कम कर सकतें हैं।
10. इसके अभ्यास से आप तनाव को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।

नटराजासन में सावधानियाँ

1.नटराजासन उनको नहीं करना चाहिए जिन्हें घुटनों में बहुत दर्द हो।
2.वैरिकोस नस से परेशान वाले व्यक्ति को इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए।
3.साइटिका के रोगियों को इससे परहेज करनी चाहिए।
4.रीढ़ की हड्डी में कोई परेशानी हो तो इन्हें करने से बचें।

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