September 10, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स, 10 सितंबर 2026। रामायण में राम-रावण युद्ध से पहले व्याकुल रावण के कक्ष का चर्चित गीत—“यही रात अंतिम, यही रात भारी…”—श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका चुनाव की इस आखिरी रात पर बिल्कुल सटीक बैठता नजर आ रहा है। 40 वार्डों में मैदान में उतरे प्रत्याशियों के पास अब मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए बस यही आखिरी रात है। लिहाजा चुनावी तापमान चरम पर है और कई दिग्गजों की साख भी दांव पर लगी हुई है।

इस बार का नगरपालिका चुनाव पिछले चुनावों से कई मायनों में अलग और बेहद रोचक रहा है। चार दशक से पालिका बोर्ड पर काबिज भाजपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है, तो विपक्ष के सामने 40 साल पुराने इस राजनीतिक दुर्ग में सेंध लगाने की बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सत्ता पक्ष ने बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। चुनावी रणनीति में साम, दाम, दंड, भेद तक के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए और अंतिम दौर में राजनीतिक अस्त्र भी खूब चले।
आचार संहिता के बीच रातोंरात बदली तस्वीर
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव प्रचार थमने से पहले और बाद के अंतिम दौर में शहर में कई ऐसे काम चर्चा का विषय बने, जिन्हें लोग सीधे चुनावी मौसम से जोड़कर देख रहे हैं। कहीं रातोंरात पाइपलाइन बिछी तो कहीं पानी घर तक पहुंचा, कहीं सड़क निर्माण ने अचानक रफ्तार पकड़ी। बैक डेट में करवाए जा रहें इन कार्यों को लेकर शहर की चौपालों पर खूब चर्चा रही। 10 बजे बाद सरे आम मुख्य बस स्टैंड पर राजनीतिक कार्यक्रम में लाउडस्पीकर बजाए गए और आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई गई। आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर निर्वाचन आयोग तक शिकायतें पहुंचने का दावा भी सामने आया है। राजनीतिक खींचतान में नेताओं के तेवर भी कई बार तल्ख हुए और आरोपों का जवाब आरोपों से तथा राजनीतिक वार का पलटवार तीखे शब्दों में होता दिखाई दिया। कुछ के बिगड़े बोल भी सामने आए। अंतिम रात तक कौन-सा समीकरण किस करवट बैठेगा, इसे लेकर शहर में अटकलों का बाजार गर्म है।
सत्ता पक्ष के सामने गढ़ बचाने की चुनौती
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भाजपा के लिए यह चुनाव केवल पार्षदों की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा। चार दशक से पालिका पर बोर्ड बनाने वाली पार्टी के सामने इस बार अपनी राजनीतिक पकड़ और नेतृत्व की साख बचाने की चुनौती है। बोर्ड गठन के लक्ष्य के लिए पूरी ताकत झोंकी गई है और अंतिम समय तक समर्थकों को सक्रिय रखने के प्रयास जारी हैं।
विपक्ष को 40 साल का किला ढहाने की आस
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दूसरी ओर विपक्षी दलों में वर्षों पुराने भाजपा गढ़ को ढहाने की छटपटाहट दिखाई दे रही है। कई प्रत्याशियों ने व्यक्तिगत स्तर पर पूरी ताकत लगा रखी है। हालांकि पार्टी के शीर्ष क्षेत्रीय नेतृत्व की सक्रियता को लेकर कार्यकर्ताओं में चर्चा रही और प्रचार अभियान में अपेक्षित जोर नजर नहीं आने की बातें भी सामने आईं। वहीं पार्टी के कुछ चेहरों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है चुनावी समर में विजय हासिल करने के लिए।
युवाओं ने जगाई नई उम्मीद, माकपा सक्रिय, रालोपा जमीन की तलाश में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इन सबके बीच विकास मंच के युवाओं ने चुनावी मैदान में अपनी अलग सक्रियता दिखाई। मंच से जुड़े युवाओं ने वार्ड-दर-वार्ड पहुंच बनाकर मतदाताओं से संपर्क किया और अपने अभियान को धार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे चुनावी मुकाबले में एक नया कोण जुड़ा और युवा राजनीति की संभावनाओं पर भी चर्चा होने लगी। वहीं माकपा भी इस बार खासी सक्रिय है और निर्णायक की भूमिका में रहने का दावा कर रही है। रालोपा भी जमीन की तलाश कर रही है।
अब सारी रणनीतियां, सारे दावे और सारे समीकरण मतदान की सुबह मतपेटी के सामने जाकर थम जाएंगे। किसका संपर्क काम आया, किसकी रणनीति सफल हुई, किसके समर्थक वोट में बदल पाए और किसका आखिरी रात का जोर बेअसर रहा—इसका फैसला मतदाता करेंगे। क्योंकि राजनीति में अंततः वही सत्य है, जो मतदाता की उंगली पर स्याही लगने के बाद ईवीएम में दर्ज होता है। जैसा गीता का संदेश है—कर्म पर ध्यान दो, परिणाम की चिंता मत करो। अब प्रत्याशियों का कर्म पूरा हो चुका है, परिणाम का अधिकार मतदाता के हाथ में है।