








श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 सितंबर 2026। निकाय चुनाव अब उस दौर में पहुंच गया है, जहां सियासत सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहने वाली है। कुर्सी की इस जंग में अब पार्टियां अपने तरकश के आखिरी तीर तक मतदाता को रिझाने की तैयारी में है। कार्यालयों में देर रात तक बैठकों का दौर, वार्डों में लगातार दौड़भाग, गलियों में प्रचार और मंचों से एक-दूसरे पर हमलों से चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। मुकाबला सिर्फ वोट मांगने का नहीं, बल्कि मतदाता के मन में अपनी जगह बनाने और विरोधी के खिलाफ माहौल खड़ा करने का हो गया है। हर खेमे में चुनावी गणित पर मंथन चल रहा है। कौन सा वार्ड किसके पक्ष में झुक रहा है, कहां सेंध लगाई जा सकती है और किस मुद्दे को हवा देकर चुनावी माहौल बदला जा सकता है, इन मौको की तलाश की जा रहे हैं।
कार्यालयों में रणनीति, मैदान में आक्रामकता
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दिनभर प्रत्याशी जनता के बीच नजर आ रहे हैं तो शाम ढलते ही चुनाव कार्यालयों में रणनीति पर मंथन शुरू हो जाता है। कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है, बूथ वार समीकरणों को खंगाला जा रहा है और कमजोर कड़ियों को मजबूत करने में की कवायद में कई अस्त्र शस्त्र का प्रयोग किया जा रहा है। एक तरफ समर्थकों की भीड़ जुटाकर ताकत दिखाने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ विरोधी खेमे की सेंधमारी रोकने की कवायद भी की जा रही है। चुनावी मैदान में हर मुलाकात, हर बैठक और हर छोटी-बड़ी राजनीतिक गतिविधि को वोट के चश्मे से देखा जा रहा है।
‘हम सही, बाकी सब गलत’ साबित करने की होड़
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव के इस दौर में मतदाता को समझदारी की दरकार है क्योंकि सबसे दिलचस्प तस्वीर आरोप-प्रत्यारोप की है। सभी खेमे खुद को जनता का असली हितैषी और सामने वाले को विफल साबित करने में जुटे है। सड़क, सफाई, पानी, बिजली, विकास कार्य और शहर की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जवाब में उपलब्धियों और योजनाओं का हिसाब सामने रखा जा रहा है। यानी जिस मुद्दे से वोट खिंच सकता है, वही मुद्दा चुनावी हथियार बनता दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर अलग मोर्चा
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जमीन से अलग इस बार चुनावी जंग मोबाइल स्क्रीन पर भी अलग मोर्चे में लड़ी जा रही है। स्क्रीन भी एक बड़ा चुनावी मैदान बन चुकी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट, वीडियो, दावे, पलटवार और पुराने बयानों को नए संदर्भ में पेश करने का सिलसिला तेज हो गया है। जो बात मंच से हजार लोगों तक पहुंचती है, वही पोस्ट और वीडियो के जरिए हजारों मोबाइल तक पहुंच रही है। ऐसे में राजनीतिक दल और प्रत्याशी सोशल मीडिया को हल्के में लेने के मूड में नही है। अपने अपने समर्थक जेन जी को इसके समाधान के लिए उतारा जा रहा है और सोशल मीडिया पर भी पोस्ट पर पोस्ट पेस्ट की जा रही है।
आखिरी दिनों में बढ़ेगा दबाव, हर वोट पर नजर
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव का अंतिम दौर और मतदान में मात्र तीन दिन शेष है। ऐसे में मुकाबला और अधिक रोचक होने की उम्मीद है। प्रत्याशियों की असली परीक्षा अब शुरू हुई है। जो आज तक समर्थक नजर आ रहे थे, उनमें से कितने मतदान के दिन बूथ तक पहुंचेंगे और पक्ष में मत देने का कार्य करेंगे ये जवाब तो 14 सितंबर को मिलेगा। हर वार्ड में छोटे-छोटे समीकरणों को साधने की कोशिश हो रही है। रूठों को मनाने से लेकर प्रभावशाली लोगों को साथ लाने तक, हर स्तर पर राजनीतिक कवायद जारी है। प्रत्याशी भी समझ रहे हैं कि अब एक-एक वोट की कीमत है और आखिरी समय में बना माहौल पूरा चुनाव पलट सकता है।
मंच पर भाषण, गलियों में हिसाब-किताब
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनावी मंचों से बड़े-बड़े दावे और आरोप सुनाई दे रहे हैं, लेकिन असली लड़ाई गलियों और घरों के दरवाजों पर लड़ी जा रही है। प्रत्याशी मतदाता के सामने अपने पक्ष का हिसाब रख रहे हैं और विरोधी के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। किसका प्रचार सिर्फ शोर है और किसकी पकड़ जमीन पर मजबूत है, इसका फैसला अब मतदाता करेगा।
सियासी बारूद का जमाव, अब धमाकों का इंतजार!
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। निकाय चुनाव की सियासत में अब माहौल ऐसा बन चुका है कि आने वाले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आरोपों की धार और तेज होगी, पुराने मुद्दे उछलेंगे, नए आरोप सामने आएंगे और हर हमले के जवाब में पलटवार भी होगा। सभी खेमों की सेनाएं मैदान में उतर चुकी हैं और सियासी बारूद भी तैयार है। अब देखना ये होगा कि आखिरी दौर में किसका वार निशाने पर लगेगा और किसका पलटवार चुनावी बाजी पलट देता है। आखिर में तमाम दावे, भाषण, प्रचार, सोशल मीडिया का शोर और सियासी रणनीतियां एक ही जगह जाकर ठहरेंगी—मतदान केंद्र पर। फैसला जनता का वोट करेगा कि नगर की कुर्सी किसके हिस्से आएगी और किसका सियासी किला ढह जाएगा।







