June 25, 2026
25-june

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 जून 2026। श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 दैनिक ​ पंचांग 📜

☀ 25-Jun-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि एकादशी 08:11 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति 04:30 PM
🔅 करण वणिज, विष्टि 07:10 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग शिव 10:53 AM
🔅 वार गुरूवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:38 AM
🔅 चन्द्रोदय 03:45 PM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 07:34 PM
🔅 चन्द्रास्त 02:26 AM
🔅 ऋतु वर्षा
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 13:55:26
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत ज्येष्ठ
🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:08 PM 01:04 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:17 AM 11:12 AM
🔅 कंटक 03:51 PM 04:47 PM
🔅 यमघण्ट 06:34 AM 07:30 AM
🔅 राहु काल 02:20 PM 04:05 PM
🔅 कुलिक 10:17 AM 11:12 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 05:42 PM 06:38 PM
🔅 यमगण्ड 05:38 AM 07:23 AM
🔅 गुलिक काल 09:07 AM 10:51 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅 शुभ 05:38 AM – 07:23 AM
🔅 रोग 07:23 AM – 09:07 AM
🔅 उद्वेग 09:07 AM – 10:52 AM
🔅 चल 10:52 AM – 12:36 PM
🔅 लाभ 12:36 PM – 02:21 PM
🔅 अमृत 02:21 PM – 04:05 PM
🔅 काल 04:05 PM – 05:49 PM
🔅 शुभ 05:49 PM – 07:34 PM
🔅 अमृत 07:34 PM – 08:49 PM
🔅 चल 08:49 PM – 10:05 PM
🔅 रोग 10:05 PM – 11:21 PM
🔅 काल 11:21 PM – 00:36 AM
🔅 लाभ 00:36 AM – 01:52 AM
🔅 उद्वेग 01:52 AM – 03:07 AM
🔅 शुभ 03:07 AM – 04:23 AM
🔅 अमृत 04:23 AM – 05:38 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:02 AM समाप्त: 07:16 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 07:16 AM समाप्त: 09:37 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 09:37 AM समाप्त: 11:54 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 11:54 AM समाप्त: 02:10 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 02:10 PM समाप्त: 04:29 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 04:29 PM समाप्त: 06:48 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 06:48 PM समाप्त: 08:52 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 08:52 PM समाप्त: 10:35 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 10:35 PM समाप्त: 00:04 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 00:04 AM समाप्त: 01:29 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 01:29 AM समाप्त: 03:05 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 03:05 AM समाप्त: 05:02 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺

गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।

गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यन्त फलदाई है।

🌼 आप सभी को निर्जला एकादशी / भीमसेनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें

आज भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय, समस्त पापों का नाश करने वाली तथा जन्म-जन्मांतर तक अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली निर्जला एकादशी का पावन पर्व है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास जी के अनुसार महाबली भीमसेन ने इसी व्रत का पालन किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन श्रद्धा एवं नियमपूर्वक बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास करने से भगवान श्री विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

चूँकि इस ब्रत में पूरा दिन जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है, अगले दिन सूर्योदय के बाद ही ब्रत का पारण करके जल पीने का विधान है इसलिए यह व्रत अत्यंत कठिन माना गया है, इसलिए इसका पुण्य भी अनंत एवं अद्वितीय बताया गया है।
एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —
🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
या
🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।
🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।
🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।
🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।
🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री