श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 अक्टूबर 2026। श्री गणेशाय नमः
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 29-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि चतुर्थी 10:11 PM
🔅 नक्षत्र रोहिणी 11:12 AM
🔅 करण बव, बालव 11:39 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग परिघ 00:05 AM
🔅 वार गुरूवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:42 AM
🔅 चन्द्रोदय 08:26 PM
🔅 चन्द्र राशि 10:07 PM
🔅 सूर्यास्त 05:52 PM
🔅 चन्द्रास्त 10:07 AM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:09:28
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:55 AM 12:39 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:25 AM 11:10 AM
🔅 कंटक 02:53 PM 03:38 PM
🔅 यमघण्ट 07:27 AM 08:12 AM
🔅 राहु काल 01:41 PM 03:04 PM
🔅 कुलिक 10:25 AM 11:10 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 04:23 PM 05:07 PM
🔅 यमगण्ड 06:42 AM 08:06 AM
🔅 गुलिक काल 09:30 AM 10:53 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 शुभ 06:43 AM - 08:06 AM
🔅 रोग 08:06 AM - 09:30 AM
🔅 उद्वेग 09:30 AM - 10:54 AM
🔅 चल 10:54 AM - 12:17 PM
🔅 लाभ 12:17 PM - 01:41 PM
🔅 अमृत 01:41 PM - 03:05 PM
🔅 काल 03:05 PM - 04:28 PM
🔅 शुभ 04:28 PM - 05:52 PM
🔅 अमृत 05:52 PM - 07:28 PM
🔅 चल 07:28 PM - 09:05 PM
🔅 रोग 09:05 PM - 10:41 PM
🔅 काल 10:41 PM - 00:17 AM
🔅 लाभ 00:17 AM - 01:54 AM
🔅 उद्वेग 01:54 AM - 03:30 AM
🔅 शुभ 03:30 AM - 05:06 AM
🔅 अमृत 05:06 AM - 06:43 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 तुला चर
शुरू: 05:53 AM समाप्त: 08:12 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:12 AM समाप्त: 10:31 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:31 AM समाप्त: 12:36 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 12:36 PM समाप्त: 02:19 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:19 PM समाप्त: 03:47 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:47 PM समाप्त: 05:13 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:13 PM समाप्त: 06:49 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:49 PM समाप्त: 08:45 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:45 PM समाप्त: 11:00 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:00 PM समाप्त: 01:20 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 01:20 AM समाप्त: 03:37 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 03:37 AM समाप्त: 05:53 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यन्त फलदाई है।
🌼 आप सभी को करवा चौथ के पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !!
आज करवा चौथ का पर्व है, यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है ।
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास, त्याग, आत्मसंयम और दांपत्य जीवन की मंगलकामना का एक विशिष्ट पर्व है। इस ब्रत में सुहागिन स्त्रियां अपने पति के कल्याण, उनकी दीर्घायु के लिए निर्जल ब्रत रखती है । यह ब्रत रात्रि में चंद्रोदय के समय छलनी से चंद्र दर्शन, पति के दर्शन और पति के हाथ से जल ग्रहण करके पूरा होता है ।
करवा चौथ का सांस्कृतिक संदेश यह है कि विवाह केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि परस्पर विश्वास, जिम्मेदारी, सम्मान और साथ निभाने का संकल्प भी है।
‘करवा’ का संबंध उस पारंपरिक मिट्टी के पात्र से माना जाता है, जिसका उपयोग पूजा और जल अर्पण में किया जाता है, जबकि ‘चौथ’ चतुर्थी तिथि का बोध कराता है। इस प्रकार करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला पर्व है।
विशेष :- करवा चौथ के इस व्रत में भद्रा और शुक्र अस्त का कोई महत्व नहीं होता है इसलिए वर्तमान में चल रही भ्रांतियों से दूर रहें और श्रद्धा पूर्वक इस व्रत का पालन करें !
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री