श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 28 अक्टूबर 2026। कमजोर मानसून ने खरीफ की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेतों में फसलें कमजोर रह गईं, उत्पादन घट गया और किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद क्षेत्र के कई गांवों में फसल खराबे की गिरदावरी में नुकसान दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में किसानों का आरोप है कि जब खेतों में नुकसान हुआ है, तो सरकारी रिकॉर्ड में खराबा दर्ज नहीं होने पर किसानों को सहायता कैसे मिलेगी?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स की पड़ताल में सामने आया है कि क्षेत्र के अनेक गांवों में किसान कम उत्पादन से परेशान हैं। बारानी खेती में भारी नुकसान हुआ है, वहीं सिंचित क्षेत्र में भी फसलों की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। किसान प्रशासन से वास्तविक स्थिति के अनुसार गिरदावरी करवाने और नुकसान की सही रिपोर्ट तैयार करने की मांग कर रहे हैं। किसानों की चिंता है कि यदि खेतों में हुए नुकसान का आकलन ही सही नहीं हुआ, तो सरकारी सहायता और फसल बीमा के लाभ मिलने में भी मुश्किल हो सकती है।
14 जिलों की 80 तहसीलों में अकाल घोषित, बीकानेर को लेकर सवाल
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कम बारिश के आंकड़ों के आधार पर सरकार ने प्रदेश के 14 जिलों की 80 तहसीलों में अकाल घोषित किया है। बीकानेर जिले का कोई उपखंड इस सूची में शामिल नहीं बताया गया है। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सिंचित भूमि का बड़ा हिस्सा होने के कारण अकाल की निर्धारित शर्तों के तहत स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वास्तविक फसल खराबे का आकलन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में गांवों में हुए नुकसान की सही गिरदावरी और सरकारी मापदंडों के अनुसार उसका मूल्यांकन ही आगे की राहत का आधार बन सकता है।
लोढ़ेरा से माणकरासर तक किसानों की पीड़ा, बारानी फसलें बुरी तरह प्रभावित
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र का उत्तरी इलाका बारानी कृषि पर ही निर्भर है। यहां गांव लोढ़ेरा, गुसाईंसर बड़ा, जालबसर, उदरासर, डेलवां और माणकरासर की रोही सहित कई इलाकों में फसल खराबे की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। किसानों के अनुसार बारानी क्षेत्र में 60 से 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। सिंचित खेती में भी उत्पादन घटने से किसानों की आर्थिक गणित बिगड़ गई है। विशेष रूप से मूंगफली की फसल में लागत निकालना तक मुश्किल होने की बात सामने आई है। किसान रणजीत गोदारा ने अपने खेत की स्थिति बताते हुए कहा कि उनके यहां प्रति बीघा महज 20 किलो मोठ का उत्पादन हुआ है। वहीं कुछ किसानों के 4 बीघा खेत में कुल 50 किलो मूंग उत्पादन होने की बात सामने आई है। बाजरे का उत्पादन भी कई खेतों में प्रति बीघा 20 से 25 किलो के आसपास बताया जा रहा है।
पछेती मूंगफली में भारी नुकसान, समय पर बिजाई करने वालों को अपेक्षाकृत राहत
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। लोढ़ेरा के किसान रामप्रताप गेट और उदरासर के किसान ओमप्रकाश जाखड़ ने बताया कि पछेती मूंगफली की फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है। उनके अनुसार मई 2026 में पहली बारिश के बाद मूंगफली की बिजाई करने वाले किसानों के खेतों में उत्पादन अपेक्षाकृत संतोषजनक रहा, लेकिन बाद में बिजाई करने वाले किसानों को अधिक नुकसान झेलना पड़ा। कई खेतों में प्रति बीघा 20 किलो मूंगफली का उत्पादन भी मुश्किल से हुआ है। इसकी सूचना प्रशासन को किसानों ने दे दी परंतु उसके बावजूद उनकी गिरदावरी में खराबा 0% दर्शाने की कारस्तानी सामने आई है। कम उत्पादन के कारण किसानों के सामने बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर किए गए खर्च की भरपाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में हुए वास्तविक नुकसान को रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं मिल पाई है।
कई रोहियों में खराबा दर्ज नहीं होने की जानकारी, रिपोर्ट का इंतजार
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार श्रीडूंगरगढ़ की रोही, डेलवां, समंदसर, माणकरासर और बिग्गा की रोही सहित कुछ क्षेत्रों में खराबा दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं डेलवां, माणकरासर, उदरासर और गुसाईंसर बड़ा के किसान पहले से ही सरकारी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग से जानकारी चाही गई तो बताया गया कि रिपोर्ट दो दिन में पूरी किए जाने की बात कही। अब किसानों की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं।
किसानों का सवाल—खेत में नुकसान तो सरकारी रिकॉर्ड में क्यों नहीं?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। फसल खराबे की गिरदावरी और राहत के आकलन को लेकर किसानों में असंतोष है। कुछ किसान बीमा कंपनियों और संबंधित व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांग है कि खेतों का वास्तविक निरीक्षण हो, फसलवार नुकसान दर्ज किया जाए और गिरदावरी रिपोर्ट में किसी भी प्रभावित किसान के साथ अन्याय नहीं हो। अब सवाल सिर्फ खराबे का आंकड़ा दर्ज करने का नहीं, बल्कि किसानों को उनके वास्तविक नुकसान के अनुरूप राहत दिलाने का है। यदि खेतों में फसलें चौपट हुई हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में नुकसान दर्ज नहीं हुआ, तो किसान सहायता के लाभ से वंचित रह सकते हैं। किसानों ने कहा कि प्रशासन और कृषि विभाग की जिम्मेदारी है कि गिरदावरी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें और प्रभावित किसानों को सहायता दिलवाए।



