श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 नवम्बर 2026। पंचायत राज चुनाव में लोकतंत्र के पर्व के बीच श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के दुसारना पीपासरिया में विरोध का ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां परिसीमन से नाराज पूरा गांव मतदान केंद्र से दूर रहा। गांव के 718 मतदाताओं में से एक भी मतदाता ने जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। 15 दिनों से जारी धरने के बावजूद ग्रामीणों को मनाने में प्रशासन विफल रहा और मतदान दिवस पर कोटासर के केंद्र संख्या 52 में सन्नाटा पसरा रहा। यहां मतों के अभिलिखित लेख पर शून्य शून्य अंकित किया गया है। दिन भर मतदान दल मतदाताओं का इंतजार करता रहा परंतु एक भी ग्रामीण वोट देने नहीं पहुंचा। सामूहिक रूप से मतदान बहिष्कार की चर्चा पूरे जिले में हो रही है। वहीं ग्रामीणों ने सरपंच चुनाव में भी मतदान नहीं करने की बात कही है।
अधिकारियों की समझाइश, ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़े
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रीड़ी पंचायत समिति के दुसारना पीपासरिया में मंगलवार को मतदान के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों का दल धरनास्थल पर पहुंचा। आरओ एवं उपखंड अधिकारी झंवरलाल मित्तल, आरओ रीड़ी दमयंती कंवर, आरओ द्वितीय तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा तथा विकास अधिकारी मनोज कुमार धायल ने ग्रामीणों से संवाद कर मतदान करने की समझाइश की। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग रहे। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से लिखित आश्वासन मिलने की शर्त रखी और मतदान करने से इनकार कर दिया।
6 किलोमीटर दूर कोटासर में शामिल करने का विरोध
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्रामीणों का विरोध पंचायत परिसीमन को लेकर है। दुसारना पंडरीकजी ग्राम पंचायत से दुसारना पीपासरिया को अलग कर करीब 6 किलोमीटर दूर कोटासर ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने के निर्णय के खिलाफ ग्रामीण पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे हैं। ग्रामीण इस बदलाव को लेकर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और प्रशासन से समाधान की मांग कर रहे हैं।
समझाइश के प्रयास पहले होते तो शायद नहीं बनते ऐसे हालात
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पूरे गांव के 718 मतदाताओं का मतदान से दूर रहना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। अनेक प्रबुद्धजनों ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि प्रशासन एवं राजनीतिक दलों द्वारा पूर्व में ही प्रभावी संवाद और संतुष्टिपूर्ण समझाइश के प्रयास किए जाते तो संभवतः पूरे गांव को मतदान से वंचित रहने जैसी स्थिति नहीं बनती। लोकतंत्र में मतदान को नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है, लेकिन परिसीमन के विरोध में ग्रामीणों का सामूहिक निर्णय चुनावी व्यवस्था के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।