July 12, 2024

श्रीडूंगरगढ टाइम्स 15 जून, 2019। सभी ग्रहों के अधिपति भगवान सूर्य वृषभ राशि की यात्रा समाप्त करके 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। जहां यह पहले से विराजमान ग्रह, मंगल, बुध और राहु के साथ युति करेंगे। इन पर शनि और केतु की परस्पर दृष्टि भी पड़ रही है। इस तरह से देखा जाए तो छह ग्रहों का परस्पर दृष्टि संबंध बन रहा है।  इस युति में मंगल 22 जून तक रहेंगे। उसके बाद अपनी नीच की राशि कर्क में प्रवेश करेंगे। बुध 20 जून को ही कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसके फलस्वरूप इन ग्रहों द्वारा बनने वाले अधिकतर योग भंग हो जाएंगे। यह युति स्वतंत्र भारत की कुंडली में वृषभ लग्न से दूसरे कुटुंब भाव में बन रही है। इसलिए आने वाला सप्ताह भारत वर्ष के लिए उपद्रवों वाला हो सकता है।

 मेष मेष राशि वालों के लिए यह युति बेहद सफलतादायक रहेगी। इस राशि के जातक आने वाले सप्ताह में कोई बड़ा निर्णय, बड़ा व्यापार या बड़े अनुबंध के लिए प्रयास कर सकते हैं। विदेश यात्रा और देशाटन पर अधिक खर्च होगा।

वृषभ — इस राशि के जातकों के लिए राशि स्वामी शुक्र के द्वारा मालव्य योग तो बना हुआ है फिर भी यह युति कई तरह के अप्रत्याशित शुभ परिणाम दिलाएगी। इस राशि के जातकों को अपनी उर्जा शक्ति का पूर्ण उपयोग करते हुए तन्मयता के साथ अपने कार्य में लग जाना चाहिए क्योंकि सुखद परिणाम आपकी प्रसन्नता में वृद्धि करेंगे।

मिथुन — मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग मिलाजुला और अप्रत्याशित परिणाम वाला सिद्ध होगा। काफी दिनों से चली आ रही आर्थिक तंगी दूर तो होगी ही व्यापार में भी विस्तार होगा, किंतु मानसिक तनाव बना रहेगा। इस दौरान सेहत के प्रति सजग रहें। यदि आप शिक्षा प्रतियोगिता शामिल होना चाहें तो बेहतरीन अवसर आया हुआ है।

कर्क — कर्क राशि के जातकों के लिए शुरुआत थोड़ी तनावपूर्ण हो सकती है। जून के तीसरे सप्ताह से मंगल और बुध इस राशि में प्रवेश करेंगे तो परिस्थितियां बेहतर और लाभदायक बनेंगी। व्यापारिक वर्ग एवं महिलाओं के लिए यह अवधि अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगी।

सिंह — इस राशि के जातकों के लिए यह संयोग आय की दृष्टि से बेहतरीन रहेगा, किंतु शिक्षा और संतान की दृष्टि से कुछ तनाव हो सकता है। इसलिए आपके धैर्य और साहस की परीक्षा होने वाली है। परिवार के बड़े लोगों अथवा भाईयों से संबंधों में प्रगाढ़ता लाएं।

कन्या — कन्या राशि के जातकों के लिए इस युति का प्रभाव चतुर्थ और दशम भाव में रहेगा। जिसके फलस्वरूप कार्य व्यापार में उतार—चढ़ाव आ सकता है लेकिन सामाजिक पद प्रतिष्ठा की बहुत अधिक वृद्धि होगी। राजनीतिज्ञों एवं समाज के संभ्रांत व्यक्तियों से मधुर संबंध भी बनेंगे और लाभ भी होगा। यदि आप चुनाव से संबंधित कोई भी निर्णय लेना चाह रहे हों तो परिस्थितियां आपके अनुकूल रहेंगी। मानसिक अशांति से भी बचते रहें।

तुला — तुला राशि वाले जातकों के लिए यह युति तृतीय एवं नवम् भाव में बन रही है। जिसके फलस्वरूप साहस और पराक्रम की वृद्धि होगी। विदेश यात्रा और तीर्थ यात्रा का सुख प्राप्त होगा। आपके द्वारा लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना होगी। विद्यार्थी वर्ग अथवा नई सर्विस के लिए अनुबंध करने वाले लोगों के लिए समय अति अनुकूल है।

वृश्चिक — इस राशि के जातकों के लिए समय बेहतर आ रहा है, इसलिए विगत कई दिनों से चली आ रही, स्वास्थ्य एवं मानसिक परेशानियों में कमी आएगी। फिर भी कार्य क्षेत्र, नौकरीपेशा में लगे लोगों को षडयंत्र का शिकार होने से बचना चाहिए। इस अवधि के मध्य यदि कोई नया अनुबंध या व्यापार करना चाहें तो परिणाम सुखद रहेगा।

धनु — धनु राशि के जातकों के लिए यह युति राशि और रशि से सप्तम भाव में बन रही है। जिसके फलस्वरूप दांपत्य जीवन में तो कटुता आ ही सकती है, व्यापार में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है, अत: कोई भी लेन—देन चाहे छोटा हो या बड़ा, उसमें सावधानी बरतें। विवाह की दृष्टि से समय अपेक्षाकृत बेहतर है। रोजगार अथवा नौकरीपेशा से जुड़े लोगों के लिए यह समय बहुत संभलकर चलने का है।

मकर — मकर राशि के जातकों के लिए यह युति अधिकाधिक मिलाजुला फल देने वाली रहेगी। कोर्ट—कचहरी के मामलों में विजयश्री हासिल होगी और शत्रु परास्त होंगे, किंतु व्यर्थ की यात्राएं और आर्थिक तंगी चिंता का कारण बनी रहेगी।

कुंभ — इस राशि के जातकों के लिए इस युति का प्रभाव पंचम और एकादश भाव पर रहेगा, अत: शिक्षा प्रतियोगिता में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए समय चुनौतीपूर्ण रहेगा। बेहतर रहेगा कि रोमांस पर अधिक समय खर्च न करें। कुछ दिन तक शिक्षा और संतान संबंधी चिंता परेशान तो करेगी, लेकिन उसके बाद सुधार आना आरंभ हो जाएगा।

मीन — मीन राशि के जातकों के लिए यह अवधि कुछ संतोषजनक समाचार लेकर आ रही है। विशेषकर आपके मित्र और परिवार के बड़े बुजुर्गों की मानसिक पीड़ा कम होगी, अत: आप कार्य व्यापार पर ध्यान लगाएं। इस अवधि के मध्य संतान प्राप्ति या प्रादुर्भाव का योग है और मकान वाहन के क्रय का संयोग भी बना है।

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