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October 13, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 अगस्त 2026। मोबाइल सिम लेते समय बरती गई एक छोटी-सी लापरवाही किसी भी व्यक्ति को गंभीर कानूनी और मानसिक परेशानी में डाल सकती है। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सामने आए एक मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आधार कार्ड और मोबाइल सिम से जुड़ी केवाईसी प्रक्रिया में थोड़ी-सी असावधानी भी साइबर अपराधियों के लिए बड़ा हथियार बन सकती है।
लखासर निवासी बलराम पुत्र मघाराम जाट को उस समय हैरानी हुई जब उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्धनगर थाना पुलिस की ओर से साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक नोटिस मिला। नोटिस मिलने के बाद जब उसने पड़ताल की तो पता चला कि उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर उसके नाम पर एक अतिरिक्त सिम कार्ड जारी किया गया था, जिसकी उसे जानकारी ही नहीं थी। परिवादी ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि 7 मार्च 2024 को गांव में आए एक सिम विक्रेता ने उसकी जियो सिम को एयरटेल में पोर्ट कराने के लिए आधार कार्ड से केवाईसी की थी। आरोप है कि इसी दौरान विक्रेता ने बिना उसकी सहमति और जानकारी के उसी के दस्तावेजों से एक दूसरी सिम भी जारी कर ली और उसे अपने पास रख लिया। बाद में इसी सिम का इस्तेमाल अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कथित साइबर धोखाधड़ी में किया गया। बलराम ने पुलिस को बताया कि वह संबंधित विक्रेता को जानता तक नहीं है। उसे केवल सिम पोर्ट कराने की जानकारी थी, जबकि दूसरी सिम जारी होने की भनक तक नहीं लगी। साइबर अपराध में उसका नाम सामने आने और पुलिस का नोटिस मिलने के बाद वह सीधे श्रीडूंगरगढ़ थाने पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने परिवादी की रिपोर्ट के आधार पर आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच थानाधिकारी कश्यप सिंह को सौंपी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अतिरिक्त सिम किसने जारी की, उसका इस्तेमाल किन लोगों ने किया और साइबर धोखाधड़ी का ये नेटवर्क कितना बड़ा है।
सावधानी ही बचाव है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल सिम अब केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, यूपीआई, ओटीपी, सोशल मीडिया और सरकारी सेवाओं की पहचान का प्रमुख आधार बन चुकी है। ऐसे में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा आपके नाम पर जारी सिम का दुरुपयोग आर्थिक अपराध, फर्जी खातों, डिजिटल ठगी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सिम कार्ड हमेशा अधिकृत विक्रेता या कंपनी के स्टोर से ही लें, केवाईसी के दौरान पूरी प्रक्रिया स्वयं देखें और अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की समय-समय पर जांच करते रहें। थोड़ी-सी सतर्कता बड़ी मुसीबत से बचा सकती है।