







श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 अक्टूबर 2026।🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 13-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि तृतीया 11:28 PM
🔅 नक्षत्र विशाखा 01:43 AM
🔅 करण तैतिल, गर 10:47 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग प्रीति 08:23 PM
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:32 AM
🔅 चन्द्रोदय 08:58 AM
🔅 चन्द्र राशि 07:12 PM
🔅 सूर्यास्त 06:07 PM
🔅 चन्द्रास्त 07:33 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:34:31
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:56 AM 12:43 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:51 AM 09:38 AM
🔅 कंटक 07:19 AM 08:05 AM
🔅 यमघण्ट 10:24 AM 11:10 AM
🔅 राहु काल 03:13 PM 04:40 PM
🔅 कुलिक 01:29 PM 02:15 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 08:51 AM 09:38 AM
🔅 यमगण्ड 09:26 AM 10:53 AM
🔅 गुलिक काल 12:20 PM 01:46 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
📜 चोघडिया 📜
🔅 रोग 06:33 AM – 07:59 AM
🔅 उद्वेग 07:59 AM – 09:26 AM
🔅 चल 09:26 AM – 10:53 AM
🔅 लाभ 10:53 AM – 12:20 PM
🔅 अमृत 12:20 PM – 01:47 PM
🔅 काल 01:47 PM – 03:13 PM
🔅 शुभ 03:13 PM – 04:40 PM
🔅 रोग 04:40 PM – 06:07 PM
🔅 काल 06:07 PM – 07:40 PM
🔅 लाभ 07:40 PM – 09:13 PM
🔅 उद्वेग 09:13 PM – 10:47 PM
🔅 शुभ 10:47 PM – 00:20 AM
🔅 अमृत 00:20 AM – 01:53 AM
🔅 चल 01:53 AM – 03:26 AM
🔅 रोग 03:26 AM – 04:59 AM
🔅 काल 04:59 AM – 06:33 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:40 AM समाप्त: 06:56 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 06:56 AM समाप्त: 09:16 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 09:16 AM समाप्त: 11:34 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:34 AM समाप्त: 01:39 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 01:39 PM समाप्त: 03:22 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:22 PM समाप्त: 04:50 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:50 PM समाप्त: 06:16 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 06:16 PM समाप्त: 07:52 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:52 PM समाप्त: 09:48 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:48 PM समाप्त: 00:03 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 00:03 AM समाप्त: 02:23 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 02:23 AM समाप्त: 04:40 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺
दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है
नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी के नाम से जाना जाता है।
माँ चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के दस हाथ हैं जिनमे तलवार, त्रिशूल, खड्ग, बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। माता का वाहन सिंह है।
मां चंद्रघंटा देवी देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान भोलेनाथ जी से विवाह करने के बाद माता ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र को सजाना शुरू कर दिया था, इसीलिए मां पार्वती को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।
नवरात्री के तीसरे दिन माता के भक्त का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। माँ चंद्रघंटा के घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की रक्षा करती है।
मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तो के समस्त संकटो और पापो का नाश हो जाता हैं। मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें उन्हें सुख-शांति व समृद्धि प्रदान करती हैं ।
आज माँ के मन्त्र का जाप अवश्य करें
या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अथवा
ॐ देवी चन्द्रघंटाये नम:
मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है। माँ की पूजां के समय भक्तो को नारंग, गेरुए रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।
तीसरे नवरात्रि के दिन माता चंद्रघंटा को मिश्री, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर इसका प्रसाद वितरित करें, इससे माता के भक्तों के सभी दुख और भय दूर हो जाते है ।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री





