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October 13, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 अगस्त 2026। नगरपालिका चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। वार्डों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ रही है, जनसंपर्क और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक भाजपा, कांग्रेस, सीपीआईएम, आरएलपी ने वार्डवार प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। विकास मंच के दो वार्डों में दो चेहरे साफ हो गए है। निर्दलीय दावेदारों ने भी अभी तक खुलकर ताल नहीं ठोकी है। ऐसे में फिलहाल चुनावी मैदान में प्रत्याशियों से ज्यादा दावेदारों की चर्चा है।
परिसीमन ने बदला पुराना चुनावी गणित
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस बार चुनावी तस्वीर का सबसे अहम पहलू वार्डों का परिसीमन है। भाजपा और कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल है कि क्या वे पिछली बार चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों पर दोबारा भरोसा जताएंगी या बदले हुए वार्डों और नए समीकरणों को देखते हुए नए चेहरों पर दांव खेलेंगी। पिछले प्रत्याशियों के पास अपने क्षेत्र में पहचान, व्यक्तिगत संपर्क, समर्थकों का नेटवर्क और चुनावी अनुभव है। ऐसे में पुराने चेहरों को दोबारा मौका देना दोनों प्रमुख दलों के लिए स्वाभाविक विकल्प हो सकता है। लेकिन इस बार नया परिसीमन ने पुराने प्रत्याशियों का गणित भी उलझाते हुए नजर आएगा।
पिछला वार्ड वही नहीं, तो पुरानी पकड़ कितनी काम आएगी?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जिस वार्ड से पिछली बार कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में था, जरूरी नहीं कि इस बार भी वही क्षेत्र उसी वार्ड का हिस्सा हो। कुछ वार्ड छोटे तो कुछ अपेक्षाकृत बड़े हो गए है। मतदाताओं की संख्या भी बड़े वार्डों में चुनौतीपूर्ण साबित होगा। वार्ड की सीमाओं और मतदाता समीकरण में बदलाव होने से पुराने प्रत्याशी की पिछली पकड़ का कितना हिस्सा नए वार्ड में है, यह भी टिकट तय करते समय महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पिछली बार कौन जीता या हारा, बल्कि सवाल यह है कि इस बार बदले हुए वार्ड में कौन सबसे मजबूत चेहरा है?
भाजपा-कांग्रेस के सामने पुराने या नए चेहरे का सवाल
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भाजपा और कांग्रेस के सामने एक तरफ पिछले चुनाव के प्रत्याशी हैं, जो अपने अनुभव और पुराने जनसंपर्क को अपनी ताकत मान रहे हैं। दूसरी तरफ नए दावेदार लगातार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। नए चेहरों का तर्क है कि बदलाव और नई सोच के साथ नए लोगों को मौका मिलना चाहिए। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टियां पिछली बार के प्रत्याशियों पर फिर दांव खेलेंगी या परिसीमन के बाद बदले नए समीकरणों को देखते हुए नए चेहरों को मैदान में उतारेंगी?

एक टिकट के लिए कई दावेदार, फैसले के बाद दिखेगा असली असर
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। एक टिकट के लिए कई दावेदार होने के कारण पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन बनाने की चुनौती भी कम नहीं है। किसी एक को टिकट मिलने के बाद दूसरे दावेदारों की भूमिका क्या होगी, यह भी आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। टिकट वितरण के बाद यदि किसी मजबूत दावेदार को टिकट नहीं मिलता है तो वह निर्दलीय मैदान में उतर सकता है। ऐसे चेहरे कई वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती खड़ी कर सकते हैं और पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाकर पूरा चुनावी गणित बदल सकते हैं। इसलिए फिलहाल निर्दलीयों की खामोशी को चुनाव की अंतिम तस्वीर मानना जल्दबाजी होगी।
सीपीएम ने मजबूती से चुनाव लड़ने का किया ऐलान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वहीं सीपीएम ने पालिका चुनाव में कमर कस कर उतरने की तैयारी कर ली है। सीपीएम नेता मजबूती के साथ चुनाव लड़ने का एलान कर चुके है। सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार माकपा ने अभी तक 26 वार्डो में टिकट भी तय कर लिए गए है। इस बार सीपीएम में भी एक एक वार्ड से कई कई दावेदार सामने आने से सीपीएम की धमक भी कस्बे के कई वार्डो में देखने को मिलेगी। इससे भी दोनों बड़ों दलों की चिंता खासी बढ़ेगी।
विकास मंच की एंट्री ने चुनाव को बनाया दिलचस्प
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस चुनाव का सबसे नया और चर्चा में आने वाला फैक्टर विकास मंच है। शहर के जागरूक युवाओं ने मिलकर इस बार विकास मंच का गठन किया है। मंच का फोकस शहर के विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीति को नई दिशा देने पर बताया जा रहा है। गठन के बाद से ही मंच से जुड़े संभावित चेहरों और इसकी चुनावी भूमिका को लेकर शहर में चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय स्तर पर विकास मंच की लोकप्रियता इस बार बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। शहर के युवाओं के साथ-साथ अलग-अलग वर्गों में मंच को लेकर चर्चा होना इसके लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
लोकप्रियता को वोट में बदलना भी चुनौती।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। हालांकि राजनीति में लोकप्रियता को वोट में बदलना सबसे बड़ी चुनौती होती है, लेकिन पहली बार बना कोई मंच अगर चुनावी चर्चा के केंद्र में आ जाए तो इसे नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होता। अब देखना यह होगा कि विकास मंच कितने वार्डों में प्रत्याशी उतारता है, किन चेहरों पर भरोसा करता है और इसकी बढ़ती लोकप्रियता मतदान के दिन कितने वोटों में बदल पाती है।