July 13, 2024

श्रीडूंगरगढ टाइम्स 18 फरवरी 2020। भगवान शिव भोलेनाथ की आराधना का पर्व ‘महाशिवरात्रि’  21 फरवरी को मनाई जाएगी। इस बार यह पर्व कई विशेष संयोगों के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार लगभग 59 साल बाद महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि में चंद्र और शनि का संयोग इस पर्व के महत्‍व को और बढ़ाएगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि, उत्तराषाढ़ा, श्रवण नक्षत्र के कई योग भी बनेंगे। इधर, महाशिवरात्रि को देखते हुए शिवालयों में रंग रोगन तथा सजावट के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, 21 फरवरी को शनि-चंद्र की मकर राशि में युति के साथ ही बृहस्पति धनु राशि में, बुध कुंभ राशि में और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति विशेष शुभफलदायी रहेगी। इसके अलावा चंद्रमा मन और शनि ऊर्जा का कारक ग्रह है। इसके चलते महाशिवरात्रि पर इस योग का साधना की सिद्धि के लिए विशेष महत्व रहेगा।

विष योग से दूर होंगे सारे कष्ट
शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस साल से पहले करीब 28 साल पहले शिवरात्रि पर विष योग 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पर ये योग बनने से इस दिन शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है।
बुध-आदित्य और सर्प योग भी रहेंगे शिवरात्रि पर
बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, इस वजह से बुध-आदित्य योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे, इस वजह से सर्प भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा। शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच रहेंगे। सूर्य और बुध कुंभ राशि में, शनि और चंद्र मकर राशि में, मंगल और गुरु धनु राशि में, शुक्र मीन राशि में रहेगा। सभी ग्रह राहु-केतु के बीच होने से सर्प योग बनेगा। कालसर्प दोष ,विष दोष पितृ दोष ,असाध्य रोग से मुक्ति मिलेगी।

पूजन का समय

महाशिवरात्रि को पहले प्रहर की पूजा शाम 6.18 से रात 9.28 तक होगी। दूसरे प्रहर की पूजा रात 9.29 से 12.39 बजे, तीसरे प्रहर की पूजा मध्यरात्रि 12.40 से 3.50 बजे तथा अंतिम प्रहर की पूजा मध्यरात्रि बाद 3.51 से सुबह 7.02 बजे तक होंगी।

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