भतीजों से है जमीन का विवाद, पढ़ें पूरी व पुख्ता खबर।




श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 नवंबर 2022। परिवारों में आपसी वैमनस्य इस कदर बढ़ रहा है कि आपसी सौहार्द की बलि चढ़ाकर रिश्ते अब सार्वजनिक रूप से फंदा डालकर विवाद की नुमाइश करने लगे है। गांव उदरासर के 65 वर्षीय बद्रीराम सुथार ने आज तहसील कार्यालय के बाहर मेन गेट पर फंदा डालकर फांसी लगाने का सीन रचा। बद्रीराम का अपने भाई दिवंगत सुमेरमल सुथार के बेटों से पैतृक जमीन का विवाद चल रहा है जिसके चलते वे उपखंड अधिकारी व तहसीलदार से जमीन दिलवाने की मांग करते हुए सार्वजनिक रूप से फंदा टांगा। तहसील के कर्मचारियों ने उनसे समझाईश की और पुलिस को बुलाया। हैड कांस्टेबल आवड़दान की टीम ने मौके पर जाकर उसे पकड़ कर 151 में गिरफ्तार कर थाने पहुंचाया है।

ये है मामला, पुराना है विवाद।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बद्रीराम सुथार ने स्वयं की जमीन व मकान बेच दिया है। वह अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा मांग रहा था और विवादित स्थान का पट्टा बद्रीराम के दिवंगत भाई के नाम से बना हुआ था। इसमें से उसे 10 बाई 30 के नाप पर मकान के लिए भूमि देने की निशानदेही करवाई गयी। ये बात गांव के पूर्व सरपंच लेखराम गोदारा व सुथार समाज के प्रतिष्ठित ग्रामीण तेजाराम सुथार सहित गणमान्य नागरिकों ने मोमासर चौकी पुलिस के सामने तय किया गया। भाई के दोनों बेटों ने हामी भर ली और अगले ही दिन तहसील कार्यालय लिखापढ़ी करने पहुंच गए। लिखापढ़ी के वक्त बद्रीराम ने 2 फुट जमीन ओर देने की मांग की और उसके भतीजों ने 12 बाई 30 की लिखापढ़ी करवा दी। इस भूमि पर बद्रीराम के बाद उसके भतीजों का मालिकाना हक होने की बात तय की गई। तीन चार दिन पूर्व भतीजों ने उसकी निशानदेही भूमि पर लगी पट्टियां तोड़ दी जिससे विवाद पुनः गर्माया। गुरूवार को जिलाकलेक्टर को पत्र देने बद्रीराम श्रीडूंगरगढ़ आया परंतु कलेक्टर का दौरा रद्द हो जाने के कारण वह आज तहसील कार्यलय पहुंच गया।

नहीं है खुद का मकान, परिवार भी साथ नहीं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। उदरासर के इस सुथार परिवार में विवाद लंबे समय से चल रहा है। बद्रीराम के एक पुत्र का पहले ही देहांत हो गया है व बीकानेर निवासी एक पुत्र के लिए थाने में परिवाद दी हुई है। उसने पुलिस को बताया कि पुत्र के कार्यों के लिए वही जिम्मेदार होगा तथा पिता के नाते उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। उनकी पत्नी लकवाग्रस्त है जिसका सहारा उसकी एकमात्र बेटी ही है। बद्रीराम गांव में अकेले ही रहता है और इसी भूमि पर मंदिर बना कर समाज को देने की बात कहता है।