July 8, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 8 जुलाई 2026। बदलते शैक्षणिक परिवेश में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारती निकेतन शिक्षण संस्थान में संगीत शिक्षा का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। संस्थान की इस पहल से अब विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ संगीत की व्यवस्थित शिक्षा भी प्राप्त होगी। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, मानसिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।
विद्यालय में संगीत प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दक्ष संगीत शिक्षक एवं प्रसिद्ध भजन गायक पुरुषोत्तम सारस्वत (काका) को सौंपी गई है। उनके निर्देशन में विद्यार्थियों को संगीत के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। संगीत कक्षाओं में स्वर, लय और ताल की बारीकियों के साथ हारमोनियम, तबला, कोंगौ, जायलोफोन, डिजेम्बे, केजॉन, मरकस, ढोलक, सिंथेसाईजर सहित विभिन्न वाद्य यंत्रों का अभ्यास कराया जाएगा तथा शास्त्रीय, सुगम और भक्ति संगीत का विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
संगीत विभाग के एचओडी सारस्वत ने बताया कि संगीत शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे गायक या वादक तैयार करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करना भी है। उन्होंने कहा, “संगीत मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और एकाग्रता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित संगीत अभ्यास से बच्चों की प्रतिभा निखरती है तथा वे सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं।”
संस्थान के संचालक मंडल के सदस्य गिरधर स्वामी ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धात्मक जीवनशैली में बच्चों पर पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में संगीत शिक्षा उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, नैतिक और रचनात्मक दृष्टि से भी समृद्ध बनाना है। संगीत शिक्षा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बच्चों को शिक्षा के साथ अपनी प्रतिभा विकसित करने का सशक्त मंच मिलेगा।”
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार भविष्य में विद्यार्थियों को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत प्रतियोगिताओं और मंचीय प्रस्तुतियों में भाग लेने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी कला को व्यापक पहचान मिल सके। संस्थान का विश्वास है कि यह नई पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगी और विद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।