पढ़ें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राज्य स्तरीय निर्वाचन प्रशिक्षक डॉ. राधाकिशन सोनी की कलम से।




श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ तथा इसमें लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को स्वीकार किया गया। लोकतंत्र अर्थात प्रजातंत्र जिसमें प्रजा अपनी इच्छा से निर्वाचन के द्वारा उम्मीदवार का चयन करती है तथा किसी विशेष दल को 5 वर्षों के लिए सत्ता में लाती है। उम्मीदवारों के चयन हेतु नियम बनाने एवं निर्वाचन प्रक्रिया को संपादित करने के लिए भारत में 25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई तथा 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू हुआ। संविधान में प्रत्येक नागरिक को कुछ अधिकार दिए गए हैं। इनके साथ ही कुछ कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं। अधिकारों में एक अधिकार है – ‘मतदान का अधिकार’ और इस अधिकार का उपयोग करके नागरिक अपने कर्तव्य को पूरा कर सकता है। लोकतांत्रिक देश की नींव भी मतदान पर निर्भर करती है। मतदान के द्वारा व्यक्ति न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकता है अपितु मतदान के द्वारा समाज देश एवं दुनिया को बदल सकता है। मतदान वही नागरिक कर सकता है जिसका नाम निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीबद्ध हो।इसके लिए भारतीय नागरिक की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने चाहिए प्रतिवर्ष 1 जनवरी को आधार तिथि मानते हुए मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है। पात्र नागरिकों के नाम जोड़कर मतदाताओं की संख्या में वृद्धि करना, विशेषता युवा मतदाताओं को प्रोत्साहित करना एवं सार्वजनिक मतदाता मताधिकार सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। मतदाताओं को मत के प्रति जागरूक करना उन्हें समझाना कि वोट आपकी ताकत है, वह आपकी आवाज है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए 25 जनवरी जो कि भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना का दिन है, को राष्ट्रीय मतदाता दिवस घोषित किया गया तथा वर्ष 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति महोदया प्रतिभा देवी पाटिल द्वारा प्रथम मतदाता दिवस का शुभारंभ किया गया। मतदाता दिवस भारतीय लोकतंत्र का जश्न मनाने का दिन है। प्रतिवर्ष यह एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2015 में आसान पंजीकरण आसान चुनाव, 2016 में समावेशी और गुणात्मक भागीदारी, 2017 में युवा एवं भविष्य के मतदाताओं को सशक्त बनाना, 2018 में आकलन योग्य चुनाव, 2019 में कोई मतदाता पीछे न छूटे, 2020 में मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनावी साक्षरता, 2021 में हमारे मतदाताओं को सशक्त, सतर्क, सुरक्षित और सूचित करना, 2022 में चुनाव को समावेशी सुलभ और सहभागी बनाना, थीम पर कार्य किया गया। आज 13 वाँ मतदाता दिवस ‘वोट जैसा कुछ नहीं, वोट जरूर डालेंगे हम’ (Nothing Like Vote, Vote for Sure) थीम पर मनाया जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग देश के मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए समय-समय पर नवाचार करता है। 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं तथा दिव्यांग मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा, नि:शुल्क डुप्लीकेट मतदाता परिचय पत्र जारी करना, मतदाताओं को पंजीकरण एवं एवं अन्य निर्वाचन सम्बन्धी जानकारी के लिए वोटर हेल्पलाइन एप तथा अन्य एप एवं पोर्टल आदि विकसित करना, निर्वाचन में होने वाली गड़बड़ियों तथा अपराधों पर निगरानी रखने और उन्हें रोकने के लिए सी-विजिल आदि आदि। कोई भी पात्र नागरिक पंजीकरण से वंचित न रहे, इसके लिए वर्ष में चार बार अर्थात 1 जनवरी 1 अप्रैल 1 जुलाई एवं 1 अक्टूबर को पंजीकरण की आधार तिथियां निर्धारित कर प्री-पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध करवाना, एपिक को स्पीड पोस्ट से मतदाता के घर पहुंचाना। इसके अलावा मतदाता सूची में मतदाता की प्रविष्टियों के प्रमाणीकरण एवं शुद्धता के लिए एपी को आधार से लिंक करवाने का सुरक्षित विकल्प प्रदान करना तो आइए आयोग द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं का उपयोग करें तथा ऐसे नागरिक जिनकी आयु 17 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, अपना नाम मतदाता सूची में लिखवाने के लिए वोटर हेल्पलाइन एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करें या अपने क्षेत्र के बीएलओ को प्रपत्र 6 जमा करवाएं। ऐसे मतदाता जिन्होंने अभी तक अपने एपिक को आधार से लिंक नहीं करवाया है, एपिक की आधार से लिंक करवाने में तत्परता बरतें।
मतदाता दिवस पर सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं तथा आज सम्मानित होने वाले सभी निर्वाचन कार्यकर्ताओं को ढेर सारी बधाइयां।