




श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 जुलाई 2026।🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 30-Jul-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि प्रतिपदा 09:32 PM
🔅 नक्षत्र श्रवण 05:44 PM
🔅 करण बालव, कौलव 08:52 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग आयुष्मान 00:04 AM
🔅 वार गुरूवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:54 AM
🔅 चन्द्रोदय 08:03 PM
🔅 चन्द्र राशि मकर
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 07:25 PM
🔅 चन्द्रास्त 06:18 AM
🔅 ऋतु वर्षा
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 13:30:46
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आषाढ
🔅 मास पूर्णिमांत श्रावण
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:13 PM 01:07 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:25 AM 11:19 AM
🔅 कंटक 03:49 PM 04:43 PM
🔅 यमघण्ट 06:48 AM 07:42 AM
🔅 राहु काल 02:21 PM 04:02 PM
🔅 कुलिक 10:25 AM 11:19 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 05:37 PM 06:31 PM
🔅 यमगण्ड 05:54 AM 07:36 AM
🔅 गुलिक काल 09:17 AM 10:58 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 शुभ 05:55 AM – 07:36 AM
🔅 रोग 07:36 AM – 09:17 AM
🔅 उद्वेग 09:17 AM – 10:59 AM
🔅 चल 10:59 AM – 12:40 PM
🔅 लाभ 12:40 PM – 02:21 PM
🔅 अमृत 02:21 PM – 04:03 PM
🔅 काल 04:03 PM – 05:44 PM
🔅 शुभ 05:44 PM – 07:25 PM
🔅 अमृत 07:25 PM – 08:44 PM
🔅 चल 08:44 PM – 10:03 PM
🔅 रोग 10:03 PM – 11:21 PM
🔅 काल 11:21 PM – 00:40 AM
🔅 लाभ 00:40 AM – 01:59 AM
🔅 उद्वेग 01:59 AM – 03:17 AM
🔅 शुभ 03:17 AM – 04:36 AM
🔅 अमृत 04:36 AM – 05:55 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कर्क चर
शुरू: 04:58 AM समाप्त: 07:19 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 07:19 AM समाप्त: 09:36 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 09:36 AM समाप्त: 11:52 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 11:52 AM समाप्त: 02:11 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 02:11 PM समाप्त: 04:30 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 04:30 PM समाप्त: 06:34 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 06:34 PM समाप्त: 08:17 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 08:17 PM समाप्त: 09:46 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:46 PM समाप्त: 11:11 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 11:11 PM समाप्त: 00:47 AM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 00:47 AM समाप्त: 02:43 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:43 AM समाप्त: 04:58 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यन्त फलदाई है।
🌼 आप सभी शिवभक्तों को सावन माह के प्रारंभ की शुभकामनायें
सावन (श्रावण) हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र और पुण्यदायक महीना माना जाता है। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पूरे माह में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
धर्मग्रंथों के अनुसार सावन में किया गया जप, तप, व्रत, दान, पूजा और सेवा सामान्य दिनों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक फलदायी होती है। इस माह में प्रकृति भी अपनी पूर्ण हरियाली और सौंदर्य से भगवान शिव की आराधना करती हुई प्रतीत होती है।
🔱 सावन माह क्यों अति पुण्यदायक माना जाता है?
समुद्र मंथन : समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया। तभी से सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
शिव-पार्वती का मिलन : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने अनेक वर्षों तक कठोर तपस्या कर इसी माह में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
देवताओं का पूजन : देवताओं और ऋषियों ने सावन माह में भगवान शिव की विशेष आराधना कर अनेक सिद्धियाँ और वरदान प्राप्त किए।
वर्षा ऋतु का आध्यात्मिक महत्व : यह महीना वर्षा ऋतु का होता है, जब प्रकृति शुद्ध, हरी-भरी और जीवनदायिनी बन जाती है। यह समय आत्मशुद्धि, संयम और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
🌸 सावन माह में क्या करना चाहिए?
✅ प्रतिदिन प्रातः स्नान कर भगवान शिव का पूजन करें। ✅ शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल आदि अर्पित करें।
✅ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें। ✅ महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जप करें। ✅ प्रत्येक सोमवार का व्रत रखें। ✅ रुद्राभिषेक कराएँ या स्वयं करें। ✅ गरीबों, गौशाला, मंदिर एवं जरूरतमंदों को दान दें। ✅ ब्रह्मचर्य, संयम और सदाचार का पालन करें।✅ क्रोध पर नियंत्रण रखें तथा मधुर वाणी बोलें। ✅ धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें। ✅ शिव पुराण, रुद्राष्टक, शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री


