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October 14, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 अक्टूबर 2026। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 14-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि चतुर्थी 01:14 AM
🔅 नक्षत्र अनुराधा 04:03 AM
🔅 करण वणिज, विष्टि 12:17 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग आयुष्मान 08:38 PM
🔅 वार बुधवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:33 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:56 AM
🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक
🔅 सूर्यास्त 06:06 PM
🔅 चन्द्रास्त 08:15 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:32:53
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 11:56 AM 12:42 PM
🔅 कंटक 04:33 PM 05:20 PM
🔅 यमघण्ट 08:52 AM 09:38 AM
🔅 राहु काल 12:19 PM 01:46 PM
🔅 कुलिक 11:56 AM 12:42 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 07:19 AM 08:05 AM
🔅 यमगण्ड 08:00 AM 09:26 AM
🔅 गुलिक काल 10:53 AM 12:19 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅 लाभ 06:33 AM – 08:00 AM
🔅 अमृत 08:00 AM – 09:26 AM
🔅 काल 09:26 AM – 10:53 AM
🔅 शुभ 10:53 AM – 12:20 PM
🔅 रोग 12:20 PM – 01:46 PM
🔅 उद्वेग 01:46 PM – 03:13 PM
🔅 चल 03:13 PM – 04:39 PM
🔅 लाभ 04:39 PM – 06:06 PM
🔅 उद्वेग 06:06 PM – 07:39 PM
🔅 शुभ 07:39 PM – 09:13 PM
🔅 अमृत 09:13 PM – 10:46 PM
🔅 चल 10:46 PM – 00:20 AM
🔅 रोग 00:20 AM – 01:53 AM
🔅 काल 01:53 AM – 03:26 AM
🔅 लाभ 03:26 AM – 05:00 AM
🔅 उद्वेग 05:00 AM – 06:33 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:36 AM समाप्त: 06:52 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 06:52 AM समाप्त: 09:12 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 09:12 AM समाप्त: 11:30 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:30 AM समाप्त: 01:35 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 01:35 PM समाप्त: 03:18 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:18 PM समाप्त: 04:46 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:46 PM समाप्त: 06:12 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 06:12 PM समाप्त: 07:48 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:48 PM समाप्त: 09:44 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:44 PM समाप्त: 11:59 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 11:59 PM समाप्त: 02:19 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 02:19 AM समाप्त: 04:36

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

🌼 आप सभी नवरात्री के चौथे दिन की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ कुष्मांडा
नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए माँ कुष्मांडा कोआदि शक्ति कहा गया है। माता का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा करने से यश, बल, आयु, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। मां कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं।

संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी माँ कूष्माण्डा कहलाती हैं।

क्योंकि मां कुष्मांडा को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय बताए गए हैं इसलिए इस दिन लाल रंग के फूलों से माँ की पूजा करने का विधान है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री