रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, जानें पौराणिक कथा, इस बंधन की सभी जानकारी।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 अगस्त 2020। सोमवार को आज रक्षा बंधन का त्योहार घर घर मनाया जाएगा। रक्षा बंधन के सम्बंध में पुराणों में कई कथाएं हैं। सर्वमान्य तथ्य को लेकर एक कथा भी है। पंडित विष्णु दत्त शास्त्री ने बताया कि भविष्य पुराण में इंद्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र से स्वस्तिवाचन के साथ इंद्र और देवगुरु बृहस्पति के मध्य प्रथम रक्षा संकल्प का सूत्रपात हुआ था। जो द्वापर में द्रौपदी और कृष्ण के मध्य पल्लवित होकर आज हमारी सभ्यता में किसी वृक्ष की तरह लहलहा रहा है। शास्त्री के अनुसार 3 अगस्त को रक्षाबंधन पर सुबह उत्ताराषाढ़ा के बाद श्रवण नक्षत्र रहेगा। रक्षाबंधन पर श्रवण नक्षत्र का होना शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और आयुष्मान दीर्घायु का शुभ संयोग भी बन रहा है। इस नक्षत्र में भाई की कलाई पर राखी बांधने से भाई, बहन दोनों दीर्घायु होते हैं।

रक्षाबंधन मुहूर्त वेला

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रावण शुक्ल पक्ष 15 सोमवार तारीख 3 – 8 – 2020 ई. इस दिन सुबह 9:26 से 11:05 तक शुभ दिवा 12 :18 से 1 : 10 तक अभिजीत दिवा 2:23 से 4:02 तक चंचल समगतिक मान्य दिवा 4:02 से 7:20 तक लाभ अमृत वेला में रक्षाबंधन मुहूर्त श्रेष्ठ रहेगा

ये है पौराणिक मान्यता
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कहा जाता है कि महाभारतकाल में जब श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था तो उस समय उनकी ऊंगली कट गयी थी। यह देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्ला फाड़ कर उनकी ऊंगली पर बांध दिया था। इसे एक रक्षासूत्र की तरह देखा गया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दिया था। इसके बाद जब भरी सभा में दुश्शासन द्रौपदी का चीरहरण कर रहा था तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज रखकर अपना वचन पूरा किया। इसी तरह आज भी भाई द्वारा बहन और बहन द्वारा भाई का साथ स्नेह व आदर से निभाया जाता है। आप सभी के लिए ये पावन पर्व शुभ और मंगल रहें।