









श्रीडूंगरगढ़ टाइम 25 सितंबर 2026। पढें आज के दिन का पूरा पंचांग पंडित विष्णुदत्त शास्त्री के साथ।
🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 25-Sep-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि चतुर्दशी 11:08 PM
🔅 नक्षत्र शतभिषा 11:23 AM
🔅 करण गर, वणिज 11:19 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग शूल 02:50 PM
🔅 वार शुक्रवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:23 AM
🔅 चन्द्रोदय 05:36 PM
🔅 चन्द्र राशि 05:33 AM
🔅 सूर्यास्त 06:27 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:48 AM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:04:10
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:01 PM 12:49 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:48 AM 09:36 AM
🔅 कंटक 01:37 PM 02:26 PM
🔅 यमघण्ट 04:51 PM 05:39 PM
🔅 राहु काल 10:55 AM 12:25 PM
🔅 कुलिक 08:48 AM 09:36 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 03:14 PM 04:02 PM
🔅 यमगण्ड 03:26 PM 04:57 PM
🔅 गुलिक काल 07:54 AM 09:24 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ
📜 चोघडिया 📜
🔅 चल 06:23 AM – 07:54 AM
🔅 लाभ 07:54 AM – 09:24 AM
🔅 अमृत 09:24 AM – 10:55 AM
🔅 काल 10:55 AM – 12:25 PM
🔅 शुभ 12:25 PM – 01:56 PM
🔅 रोग 01:56 PM – 03:26 PM
🔅 उद्वेग 03:26 PM – 04:57 PM
🔅 चल 04:57 PM – 06:27 PM
🔅 रोग 06:27 PM – 07:57 PM
🔅 काल 07:57 PM – 09:26 PM
🔅 लाभ 09:26 PM – 10:56 PM
🔅 उद्वेग 10:56 PM – 00:25 AM
🔅 शुभ 00:25 AM – 01:55 AM
🔅 अमृत 01:55 AM – 03:24 AM
🔅 चल 03:24 AM – 04:54 AM
🔅 रोग 04:54 AM – 06:23 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:51 AM समाप्त: 08:07 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 08:07 AM समाप्त: 10:26 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:26 AM समाप्त: 12:45 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 12:45 PM समाप्त: 02:50 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 02:50 PM समाप्त: 04:33 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 04:33 PM समाप्त: 06:01 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:01 PM समाप्त: 07:27 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 07:27 PM समाप्त: 09:03 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:03 PM समाप्त: 10:59 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:59 PM समाप्त: 01:14 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 01:14 AM समाप्त: 03:34 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:34 AM समाप्त: 05:51 AM
दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधनाकरने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌼 आप सभी को अनंत चतुर्दशी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी है । चतुर्दशी तिथि को भगवान भोलेनाथ की पूजा का विधान है लेकिन अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान श्री विष्णु अनंत स्वरूप को समर्पित है और गणेश चतुर्थी से गणेशजी का दस दिवसीय उत्सव भी अनंत चर्तुदशी पर समाप्त होता है।
इस दिन भगवान श्री विष्णु जी के अनन्त भगवान की पूजा करके समस्त संकटों से रक्षा करने वाला अनन्त सूत्र को बांधा जाता है। कहा जाता है कि जब पाण्डव जुए में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में बहुत कष्टों को भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण जी ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी
उनकी आज्ञा अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर जी ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से अनंत चतुर्दशी व्रत करके अनन्त सूत्र को धारण किया था । इसी अनन्त चतुर्दशी के व्रत के प्रभाव से पांडवो के सभी कष्ट दूर हो गए थे और महाभारत के युद्ध में उन्हें जीत प्राप्त हुई थी ।
इस दिन शेषनाग की शैय्या पर लेटे हुए भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के समक्ष चौदह गांठों से युक्त अनन्तसूत्र (डोरा ) रखें अर्थात उस डोरे में समान दुरी पर 14 गांठ लगाएं ।
इसके बाद ‘ॐ अनन्तायनम:‘ मंत्र से भगवान विष्णु तथा अनंत सूत्र की विधि से पूजा करें। यह चौदह गांठें चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं ।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री





