August 29, 2026
WhatsApp Image 2026-08-28 at 19.29.08 (1)

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 28 अगस्त 2026। नगर निकाय चुनाव के मतदान की तारीख 9 सितंबर से 11 सितंबर किए जाने से श्रीडूंगरगढ़ में एक नई बहस छेड़ गई है। बीकानेर में रामदेवरा पदयात्रियों की सुविधा को देखते हुए चुनाव की तारीख 11 सितंबर से घटाकर 9 सितंबर कर दी गई, लेकिन श्रीडूंगरगढ़ में स्थिति इसके ठीक उलट हो गई। यहां बढ़ाई गई तिथि ने पदयात्री व सेवा संघो के लिए लिए मुश्किलें ही नहीं मुसीबतें खड़ी कर दी है। अब चर्चा का विषय ये है कि जब बीकानेर के पदयात्रियों की परेशानी को देखते हुए चुनाव की तारीख बदली जा सकती है, तो श्रीडूंगरगढ़ के हजारों पदयात्रियों के लिए ऐसा क्यों नहीं हो सकता? लोगों का कहना है कि लोकमंत्र में सभी के मत का समान महत्व है। ऐसे में शहर के हजारों मतदाताओं के मतदान से वंचित रहने का खतरा भी मंडरा रहा है। श्रीडूंगरगढ़ से रामदेवरा जाने वाले पैदल संघों का कार्यक्रम पहले से तय था। बड़ी संख्या में पदयात्री 6,7 और 8 सितंबर को यात्रा पर रवाना होने वाले हैं। परंतु पहले मतदान 9 सितंबर को होना था, इसलिए यात्रियों ने अपनी यात्रा और मतदान दिवस को ध्यान में रखते हुए सभी संघो ने बीच का रास्ता निकाला। अधिकांश संघों ने तिथि में बदलाव किया। वहीं कुछ ने निकटवर्ती स्थान से आकर मतदान कर वापस लौटने की रणनीति बनाई, जिससे मतदान किया जा सकें। परंतु अब मतदान 11 सितंबर होने से पूरा गणित बदल गया है। पदयात्री संघ अब अपनी यात्रा की तारीख आगे नही बढ़ा सकते क्यों की अब अगर प्रस्थान तिथि आगे बढ़ाई गई तो निश्चित समय पर पदयात्री रामदेवरा नही पहुचं पाएंगे। अब यदि यात्रा 7,8 को रवाना होती है तो यात्रा पर निकल चुके पदयात्रियों के लिए मतदान के दिन वापस श्रीडूंगरगढ़ पहुंचना आसान नहीं होगा क्योंकि वे 11 सितंबर तक दूर तलक पहुंच चुकें होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा बीकानेर और श्रीडूंगरगढ़ की स्थिति को लेकर हो रही है। बीकानेर में यात्रियों और धार्मिक आयोजनों को देखते हुए चुनाव 11 सितंबर की बजाय 9 सितंबर कराया जा रहा है। वहीं श्रीडूंगरगढ़ में पदयात्रियों का बड़ा कार्यक्रम होने के बावजूद मतदान 11 सितंबर को रखा गया है। यानी वहां यात्रियों की सुविधा के लिए चुनाव की तारीख बदली गई, जबकि यहां पदयात्रियों को अपनी यात्रा का कार्यक्रम बदलने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी अंतर ने अब एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या श्रीडूंगरगढ़ के पदयात्रियों की परेशानी को भी उतनी ही गंभीरता से नहीं देखा जाना चाहिए? सवाल एक यह भी है कि क्या श्रीडूंगरगढ़ के नेता अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर यात्रियों व प्रत्याशियों को राहत दिलवा पाएंगे? तारीख बदलने का असर केवल पैदल यात्रियों तक सीमित नहीं है बल्कि बाहर रहने वाले अनेक प्रवासी मतदाताओं पर भी खासा पड़ रहा है।
सवाल मतदान प्रतिशत का भी है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रामदेवरा पदयात्रा कस्बे में कोई छोटा आयोजन नहीं है। इस यात्रा में अधिकांशत: बहुसंख्यक वर्ग के लोग ही शामिल होते है। बहुसंख्यकों के वार्डों से औसतन 100 श्रद्धालु पदयात्रा या सेवा संघों में शामिल होते है।  ऐसे में उनके मतदान से वंचित रह जाने से मतदान का प्रतिशत भी गिरने की आशंका है। जिससे विभिन्न विचारधाराओं के प्रत्याशियों को भी वोट की चिंता भी सता रही है। यही कारण है कि अब चुनावी चर्चा में यह मुद्दा लगातार जोर पकड़ रहा है। विभिन्न स्तरों पर इसकी शिकायत की जा रही है व मतदान तिथि 9 को करने की गुजारिश की जा रही है। हालांकि ये फैसला पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय पर ही टिका है। फिलहाल निगाहें प्रशासन और निर्वाचन आयोग के अगले निर्णय पर हैं। क्योंकि इस बार मतदान की तारीख का फैसला केवल प्रत्याशियों के कार्यक्रम को नहीं, हजारों मतदाताओं के मतदान के अधिकार और नफा नुकसान के चुनावी समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।