


श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 4 अगस्त 2026। शिक्षा विभाग द्वारा जर्जर विद्यालय भवनों के उपयोग पर रोक लगाए जाने के बाद श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। हालात यह हैं कि गांव सेरूणा के महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 235 विद्यार्थी खुले मैदान, टिनशेड और पेड़ों की छांव में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, क्योंकि विद्यालय का एक भी कक्ष वर्तमान में उपयोग योग्य नहीं बचा है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने 9 जुलाई को श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के 37 गांवों के 45 विद्यालयों के कुल 237 कक्षों को जर्जर घोषित करते हुए उन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी किए। वहीं इन विद्यालयों से अलग अनेक स्कूलों में कमरों की मरम्मत के बाद ही उपयोग में लेने के निर्देश भी जारी किए। इसके बाद कई विद्यालयों में कक्षाएं खुले आसमान के नीचे संचालित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
11 कमरों वाला विद्यालय, अब एक भी उपयोग योग्य नहीं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सेरूणा स्थित महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में पहली से बारहवीं तक 235 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में कुल 11 कक्ष हैं, जिनमें एक पूरी तरह जर्जर घोषित किया गया है, जबकि शेष 10 कक्षों को मरम्मत के बाद ही उपयोग योग्य माना गया है। ऐसे में विद्यालय की सभी कक्षाएं मैदान में टिनशेड और पेड़ों के नीचे संचालित हो रही हैं। एक साथ चल रही कक्षाओं के कारण शोर-शराबा, ध्यान भटकने और मौसम की मार से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण तैयार, लेकिन नियम बने बाधा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। विद्यालय की समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से पट्टियों की छत वाले कमरों की मरम्मत कराने का प्रस्ताव रखा। हालांकि समसा अधिकारियों ने नियमानुसार आरसीसी छत निर्माण की आवश्यकता बताते हुए अनुमति नहीं दी। ग्रामीणों का कहना है कि आरसीसी निर्माण पर आने वाला भारी खर्च वहन करना उनके लिए संभव नहीं है।
सरकार से बजट जारी करने की मांग
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। लोक समता समिति के एडवोकेट भरतसिंह राठौड़ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायक, जिला कलेक्टर एवं शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर विद्यालय भवन की मरम्मत एवं निर्माण के लिए विशेष बजट उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की विज्ञान संकाय सहित सभी कक्षाएं खुले मैदान में संचालित हो रही हैं, जिससे विद्यार्थियों के शिक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
गांव के अन्य तीन सरकारी विद्यालयों की स्थिति भी चिंताजनक
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सेरूणा के अन्य सरकारी विद्यालय भी जर्जर भवनों की समस्या से जूझ रहे हैं। राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय नारसीसर में 120 छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन यहां भी एक भी कक्ष बैठने योग्य नहीं है। दो कक्ष पूरी तरह जर्जर हैं, जबकि आठ मरम्मत योग्य बताए गए हैं। इसी प्रकार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 385 विद्यार्थियों के लिए केवल पांच कक्ष ही उपयोग योग्य बचे हैं। वहीं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत 57 विद्यार्थियों के लिए भी एक भी सुरक्षित कक्ष उपलब्ध नहीं है।
“सरकार आगे आए, तभी होगा समाधान”
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरपंच प्रतिनिधि रणवीरसिंह ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन समितियां एवं ग्राम पंचायत अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन इस समस्या का समाधान केवल ग्रामीणों के सहयोग से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार को तत्काल विशेष बजट जारी कर विद्यालय भवनों की मरम्मत एवं निर्माण कार्य शुरू करवाना चाहिए। देखें वीडियो:- https://www.facebook.com/share/v/1BMZCvfnH3/






