February 25, 2024

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 अक्टूबर 2020। 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

🌻मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020🌻

सूर्योदय: 🌄 06:36
सूर्यास्त: 🌅 18:13
चन्द्रोदय: 🌝 21:06
चन्द्रास्त: 🌜10:10
अयन 🌕 दक्षिणायन
ऋतु: ❄️ शरद
शक सम्वत: 👉 1942
विक्रम सम्वत: 👉 2077
मास 👉 आश्विन (अधिक)
पक्ष 👉 कृष्ण
तिथि👉 चतुर्थी 12:31 तक
नक्षत्र 👉 कृतिका 17:54 तक
योग 👉 सिद्धि 12:56 तक
करण 👉 बालव 12:31 तक
कौलव 01:42 तक
अभिजित मुहूर्त 👉12:01-12:48
राहुकाल 👉03:19-04:46
दिशाशूल 👉 उतर

〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
☄चौघड़िया विचार☄
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – रोग=06:30-08:03
२ – उद्वेग =08:03-09:30
३ – चर =09:30-10:57
४ – लाभ =10:57-12:25
५ – अमृत =12:25-01:52
६ – काल =01:52-03:19
७ – शुभ =03:19-04:46
८ – रोग =04:46-06:13

॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – काल =06:13-07:46
२ – लाभ =07:46-09:19
३ – उद्वेग =09:19-10:52
४ – शुभ =10:52-12:25
५ – अमृत =12:25-01:58
६ – चर =01:58-03:31
७ – रोग =03:31-05:04
८ – काल =05:04-06:36

मंगलवार को करने योग्य विशेष धर्म कर्म- मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।

(प.विष्णुदत्त शास्त्री)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!