श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 16 अक्टूबर 2026। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।

वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।

योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।

*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

 

📜 आज का पंचांग 📜

 

☀ 16-Oct-2026

☀ Sri Dungargarh, India

 

🔅 तिथि षष्ठी 05:55 AM

🔅 नक्षत्र ज्येष्ठा 06:48 AM

🔅 करण कौलव, तैतिल 04:39 PM

🔅 पक्ष शुक्ल  

🔅 योग शोभन 10:05 PM

🔅 वार शुक्रवार  

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    

🔅 सूर्योदय 06:34 AM

🔅 चन्द्रोदय 11:46 AM

🔅 चन्द्र राशि 06:48 AM

🔅 सूर्यास्त 06:04 PM

🔅 चन्द्रास्त 09:56 PM

🔅 ऋतु शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष    

🔅 शक सम्वत 1948 पराभव

🔅 काली सम्वत 5127

🔅 दिन काल 11:29:41

🔅 विक्रम सम्वत 2083  

🔅 मास अमांत आश्विन

🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन

☀ शुभ और अशुभ समय    

☀ शुभ समय    

🔅 अभिजीत 11:56 AM 12:42 PM

☀ अशुभ समय    

🔅 दुष्टमुहूर्त 08:52 AM 09:38 AM

🔅 कंटक 01:28 PM 02:14 PM

🔅 यमघण्ट 04:32 PM 05:18 PM

🔅 राहु काल 10:53 AM 12:19 PM

🔅 कुलिक 08:52 AM 09:38 AM

🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 03:00 PM 03:46 PM

🔅 यमगण्ड 03:11 PM 04:38 PM

🔅 गुलिक काल 08:00 AM 09:27 AM

☀ दिशा शूल    

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल    

☀ ताराबल    

🔅 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती    

☀ चन्द्रबल    

🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

 

📜 चोघडिया 📜

 

🔅 चल 06:34 AM - 08:01 AM

🔅 लाभ 08:01 AM - 09:27 AM

🔅 अमृत 09:27 AM - 10:53 AM

🔅 काल 10:53 AM - 12:19 PM

🔅 शुभ 12:19 PM - 01:45 PM

🔅 रोग 01:45 PM - 03:11 PM

🔅 उद्वेग 03:11 PM - 04:38 PM

🔅 चल 04:38 PM - 06:04 PM

🔅 रोग 06:04 PM - 07:38 PM

🔅 काल 07:38 PM - 09:11 PM

🔅 लाभ 09:11 PM - 10:45 PM

🔅 उद्वेग 10:45 PM - 00:19 AM

🔅 शुभ 00:19 AM - 01:53 AM

🔅 अमृत 01:53 AM - 03:27 AM

🔅 चल 03:27 AM - 05:01 AM

🔅 रोग 05:01 AM - 06:34 AM

 

📜 लग्न तालिका 📜

 

🔅 कन्या द्विस्वाभाव  

शुरू: 04:28 AM समाप्त: 06:44 AM

 

🔅 तुला चर  

शुरू: 06:44 AM समाप्त: 09:04 AM

 

🔅 वृश्चिक स्थिर  

शुरू: 09:04 AM समाप्त: 11:22 AM

 

🔅 धनु द्विस्वाभाव  

शुरू: 11:22 AM समाप्त: 01:27 PM

 

🔅 मकर चर  

शुरू: 01:27 PM समाप्त: 03:10 PM

 

🔅 कुम्भ स्थिर  

शुरू: 03:10 PM समाप्त: 04:38 PM

 

🔅 मीन द्विस्वाभाव  

शुरू: 04:38 PM समाप्त: 06:04 PM

 

🔅 मेष चर  

शुरू: 06:04 PM समाप्त: 07:40 PM

 

🔅 वृषभ स्थिर  

शुरू: 07:40 PM समाप्त: 09:36 PM

 

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव  

शुरू: 09:36 PM समाप्त: 11:51 PM

 

🔅 कर्क चर  

शुरू: 11:51 PM समाप्त: 02:11 AM

 

🔅 सिंह स्थिर  

शुरू: 02:11 AM समाप्त: 04:28 AM

 

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधनाकरने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

 

🌼 आप सभी को नवरात्री के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ कात्यायनी

 

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। मां कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जानी जाती हैं।

 

मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था, जिस कारण मां कात्यायनी को असुरों और पापियों का संहार करने वाली देवी कहा जाता है। इनकी सवारी सिंह है।

 

मां कात्यायनी की चार भुजा हैं इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल तथा अन्य दोनों हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा है।

 

माता कात्यायनी की पूजा से विवाह में हो रही बाधाएं दूर होती है, देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और कन्याओं को अच्छा मिलने के योग बनते हैं, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बनता है।

 

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी।

 

मां कात्यायनी की पूजा माता को लाल या पीले फूल, कच्‍ची हल्‍दी की गांठ एवं चांदी के या मिटटी के पात्र में शहद अर्पित करके, शहद का भोग लगाकर शाम को गोधुलि बेला में करनी चाहिए।

 

नवरात्रि के छठवें दिन अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए गोबर के कंडे जलाकर माँ कात्यायनी के मंत्रो का जाप करते हुए उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें।

 

नवरात्री के छठे दिन भक्तो को यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

 

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री