श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 अक्टूबर 2026। श्री गणेशाय नम:🚩 

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀ 25-Oct-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि  चतुर्दशी  11:57 AM
🔅 नक्षत्र  रेवती  07:22 PM
🔅 करण  वणिज, विष्टि  11:57 AM
🔅 पक्ष  शुक्ल  
🔅 योग  हर्शण  05:21 PM
🔅 वार  रविवार  
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    
🔅 सूर्योदय    06:40 AM
🔅 चन्द्रोदय    05:08 PM
🔅 चन्द्र राशि    07:22 PM
🔅 सूर्यास्त    05:55 PM
🔅 चन्द्रास्त     06:37 AM
🔅 ऋतु    हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष    
🔅 शक सम्वत  1948  पराभव
🔅 काली सम्वत    5127
🔅 दिन काल    11:15:33
🔅 विक्रम सम्वत  2083  
🔅 मास अमांत    आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत    आश्विन
☀ शुभ और अशुभ समय    
☀ शुभ समय    
🔅 अभिजीत  11:55 AM  12:40 PM
☀ अशुभ समय    
🔅 दुष्टमुहूर्त  04:25 PM  05:10 PM
🔅 कंटक  10:25 AM  11:10 AM
🔅 यमघण्ट  01:25 PM  02:10 PM
🔅 राहु काल  04:31 PM  05:55 PM
🔅 कुलिक  04:25 PM  05:10 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम  11:55 AM  12:40 PM
🔅 यमगण्ड  12:17 PM  01:42 PM
🔅 गुलिक काल  03:06 PM  04:31 PM
☀ दिशा शूल    
🔅 दिशा शूल    पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल    
☀ ताराबल    
🔅 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती    
☀ चन्द्रबल    
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 उद्वेग  06:40 AM -   08:04 AM
🔅 चल  08:04 AM -   09:29 AM
🔅 लाभ  09:29 AM -   10:53 AM
🔅 अमृत  10:53 AM -   12:18 PM
🔅 काल  12:18 PM -   01:42 PM
🔅 शुभ  01:42 PM -   03:06 PM
🔅 रोग  03:06 PM -   04:31 PM
🔅 उद्वेग  04:31 PM -   05:55 PM
🔅 शुभ  05:55 PM -   07:31 PM
🔅 अमृत  07:31 PM -   09:06 PM
🔅 चल  09:06 PM -   10:42 PM
🔅 रोग  10:42 PM -    00:18 AM
🔅 काल   00:18 AM -    01:53 AM
🔅 लाभ   01:53 AM -    03:29 AM
🔅 उद्वेग   03:29 AM -    05:04 AM
🔅 शुभ   05:04 AM -    06:40 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 तुला  चर  
शुरू: 06:09 AM    समाप्त: 08:28 AM

🔅 वृश्चिक  स्थिर  
शुरू: 08:28 AM    समाप्त: 10:47 AM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव  
शुरू: 10:47 AM    समाप्त: 12:51 PM

🔅 मकर  चर  
शुरू: 12:51 PM    समाप्त: 02:34 PM

🔅 कुम्भ  स्थिर  
शुरू: 02:34 PM    समाप्त: 04:03 PM

🔅 मीन  द्विस्वाभाव  
शुरू: 04:03 PM    समाप्त: 05:28 PM

🔅 मेष  चर  
शुरू: 05:28 PM    समाप्त: 07:04 PM

🔅 वृषभ  स्थिर  
शुरू: 07:04 PM    समाप्त: 09:00 PM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव  
शुरू: 09:00 PM    समाप्त: 11:15 PM

🔅 कर्क  चर  
शुरू: 11:15 PM    समाप्त:  01:36 AM

🔅 सिंह  स्थिर  
शुरू:  01:36 AM    समाप्त:  03:53 AM

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव  
शुरू:  03:53 AM    समाप्त:  06:09 AM

🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺

दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे 

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है 

🌼 आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें
आज अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अति शुभ शरद पूर्णिमा है । आज शरद पूर्णिमा है, अश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है, यह दिन माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है । मान्यता है इसी दिन माँ लक्ष्मी का अवतरण हुआ था ।

शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी जी की आराधना करने से घोर से घोर आर्थिक संकट भी दूर हो जाते है जीवन में सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की वर्षा होने लगती है ।

पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ रविवार 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगा तथा इसका समापन सोमवार 26 अक्टूबर को प्रात: को 09 बजकर 42 मिनट पर होगा।

उदया तिथि के अनुसार तो स्नान, दान की पूर्णिमा तिथि सोमवार 26 अक्टूबर को है लेकिन चूँकि पूर्णिमा के दिन रात्रि में चन्द्रमा का मान होता है इसलिए शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय सांय 5 बजकर 8 बजे का है ।

इस बार 30 वर्षो के बाद शरद पूर्णिमा पर अति शुभ हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है इसलिए इस दिन का और भी अधिक महत्त्व बढ़ गया है ।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी पूर्ण सोलह कलाओं के साथ अवतरित होता है, इस दिन चन्द्रमा की किरणों में अमृत का वास माना गया है ।

इस दिन खीर बनाकर उसे महीन कपड़े से ढककर चन्द्रमा की रौशनी में रखकर उसका भोग माँ लक्ष्मी को लगाने से अतुल ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ।

शरद पूर्णिमा लक्ष्मी पूजन करने से जीवन से अवरोध दूर होते है, कोर्ट, कचहरी, राज द्वार के कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

शरद पूर्णिमा के दिन इस फल मतीरा को भगवान श्री विष्णु जी को चढ़ाने, इस फल की पूजा करने से माँ लक्ष्मी उस घर में अवश्य ही आती है ।


पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री