🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 01-Nov-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि सप्तमी 02:53 PM
🔅 नक्षत्र पुष्य 04:31 AM
🔅 करण बव, बालव 02:53 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग साघ्य 02:38 PM
🔅 वार रविवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:44 AM
🔅 चन्द्रोदय 11:48 PM
🔅 चन्द्र राशि कर्क
🔅 सूर्यास्त 05:49 PM
🔅 चन्द्रास्त 12:58 PM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:05:02
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:55 AM 12:39 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:21 PM 05:05 PM
🔅 कंटक 10:26 AM 11:10 AM
🔅 यमघण्ट 01:23 PM 02:08 PM
🔅 राहु काल 04:26 PM 05:49 PM
🔅 कुलिक 04:21 PM 05:05 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 11:55 AM 12:39 PM
🔅 यमगण्ड 12:17 PM 01:40 PM
🔅 गुलिक काल 03:03 PM 04:26 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ
📜 चोघडिया 📜
🔅 उद्वेग 06:45 AM - 08:08 AM
🔅 चल 08:08 AM - 09:31 AM
🔅 लाभ 09:31 AM - 10:54 AM
🔅 अमृत 10:54 AM - 12:17 PM
🔅 काल 12:17 PM - 01:40 PM
🔅 शुभ 01:40 PM - 03:03 PM
🔅 रोग 03:03 PM - 04:26 PM
🔅 उद्वेग 04:26 PM - 05:49 PM
🔅 शुभ 05:49 PM - 07:26 PM
🔅 अमृत 07:26 PM - 09:03 PM
🔅 चल 09:03 PM - 10:40 PM
🔅 रोग 10:40 PM - 00:17 AM
🔅 काल 00:17 AM - 01:54 AM
🔅 लाभ 01:54 AM - 03:31 AM
🔅 उद्वेग 03:31 AM - 05:08 AM
🔅 शुभ 05:08 AM - 06:45 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 तुला चर
शुरू: 05:41 AM समाप्त: 08:01 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:01 AM समाप्त: 10:19 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:19 AM समाप्त: 12:24 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 12:24 PM समाप्त: 02:07 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:07 PM समाप्त: 03:35 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:35 PM समाप्त: 05:01 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:01 PM समाप्त: 06:37 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:37 PM समाप्त: 08:33 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:33 PM समाप्त: 10:48 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 10:48 PM समाप्त: 01:08 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 01:08 AM समाप्त: 03:25 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 03:25 AM समाप्त: 05:41 AM
🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺
दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है
🌼 आज अति शुभ रविवारीय सप्तमी है । सप्तमी और रविवार दोनों के ही स्वामी भगवान सूर्य देव जी है, इसके संयोग को रविवारीय सप्तमी कहा जाता है जो अत्यंत पुण्यदायक तिथि मानी जाती है । रविवारीय सप्तमी के दिन किया गया जप, तप, दान अनंत गुना फलदायी होता है ।
होली, दीवाली ,जन्माष्टमी, और शिवरात्रि के दिन में जप, तप, दान करने का जितना फल मिलता है है उतना ही फल रविवारी सप्तमी के दिन भी मिलता है ।
🌼 आज अति शुभ रवि पुष्य नक्षत्र है । पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है, इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में गोचर करते हैं ।
पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है, उसमें भी रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ माने जाते है। इस अवसर पर किया गया शुभ कार्य अति लाभ दायक और चिरस्थाई होता है।
पुष्य नक्षत्र का नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पीपलं तथा नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना जाता है।
शास्त्रों में लिखा है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं ।
पुष्य नक्षत्र माँ लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है । पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, श्री महा लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर, शांत, महत्वाकांक्षी, साहसी, सुखी, भोगी, लोकप्रिय, बुद्धिमान, परोपकारी, कड़ी मेहनत करने वाले तथा पुत्र मित्रादि से युक्त होता है।
लेकिन पुष्य नक्षत्र के लोग स्वार्थी, अत्यधिक बोलने वाले, जिद्दी, घमंडी, कट्टरपंथी और अत्यधिक संवेदनशील भी होते हैं।
पुष्य नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 2, भाग्यशाली रंग लाल, नीला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और बुधवार होता है ।
पंडित विष्णुदत्त शास्त्री