






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 जुलाई 2026। क्षेत्र में आखिरकार नैतिकता की जीत हुई और धीरदेसर चोटियान में शराब ठेका बंद करवाने की दिशा में शुभ संदेश आया है।
गांव में स्कूल व मंदिर के पास संचालित इस ठेके को बंद करवाने के लिए ग्रामीणों का धरना 684 दिनों से जारी था। ग्रामीण गांव से हर हाल में ठेका बंद करवाने पर अड़े थे। मंगलवार को जिला आबकारी अधिकारी संजीव कुमार पटावरी ने कि धीरदेसर चोटियान की दुकान कोड 0701036 को बंद करने के आदेश दिए है। आदेश में दुकान के संचालन को लेकर जनविरोध को देखते हुए इस दुकान को बंद करने व इसे अन्य किसी स्थान पर स्थानान्तरित करने पर भी रोक लगाई गई है। मामले की हाईकोर्ट में पैरवी कर रहें एडवोकेट राकेश चोटिया ने बताया कि मंगलवार को आबकारी विभाग के कमिश्नर नमित मेहता कोर्ट में उपस्थित रहें। वहीं राज्य की ओर से पैरवी कर रहें एएजी महावीर बिश्नोई ने कोर्ट को बताया कि आबकारी अधिकारी बीकानेर को धीरदेसर चोटियान में संचालित शराब की दुकान की अनुमति वापस ले ली गई है। वहीं इसे पंचायत की सीमा से बाहर एक वैकल्पिक जगह दी जाएगी। कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए मामला बंद करने का आदेश दिया है। विदित रहें इस मामले में ग्रामीणों ने हाईकोर्ट से जनमत का आदेश भी ले लिया था, जिसपर प्रशासन की ढुलमुल नीति के कारण पालन नहीं हो सका। इसी की पालना के लिए कोर्ट के मार्फत प्रयास भी जारी थे, परंतु आज ग्रामीणों की जीत के साथ मामला बंद हो गया है।
क्षेत्र के संघर्षशील व जुझारू व्यक्तित्व तथा इस जंग के सूत्रधार रहे एडवोकेट श्याम सुंदर आर्य ने इसे जागरूक जनता की जीत बताया है। आर्य ने कहा कि जनता जागरूक हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल से जीता सकता है। ये गांव के गरीब लोगों की प्रशासन के खिलाफ लड़ाई थी, जो ग्रामीणों ने अपने धैर्य के बल पर साथ जीत ली है। आर्य ने इस आंदोलन में सहयोगी व सक्रिय रहें सभी ग्रामीणों व युवाओं का आभार जताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के लोग व युवा ये सीख ले सकते है, कि यदि धैर्य के साथ अन्याय के खिलाफ लड़ा जाए तो सामने कोई कितना ही ताकतवर हो या प्रशासन व सरकार हो, जीत निश्चित होगी। विदित रहें शराब के नशे से पीड़ित गांव की बालिकाओं की एक छोटी सी गुहार के बाद ये जनांदोलन खड़ा हुआ और ग्रामीणों ने एकजुट होकर ठेका बंद करवाने की ठान ली। ये मुहिम एक नजीर बन गई है और इस जीत से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है।









