May 21, 2024

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 फरवरी 2023। वर्ष 1949 की फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को सरदारशहर में हुआ अणुव्रत का ऐतिहासिक प्रतिपादन आज विश्व का सबसे लंबा चलने वाला आंदोलन बन गया है। यह आचार्यश्री तुलसी का मानवता को दिया गया वह अवदान है जिसके माध्यम से मानव निर्माण का कार्य सतत चल रहा है। वर्ष 2023 में अणुव्रत के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया जा रहा अमृत महोत्सव वर्ष की सार्थकता तभी है जब जन जन द्वारा अणुव्रत सिद्धांतों को अपने जीवन में शामिल कर मानवता को उच्च शिखर पर ले जाने का कार्य किया जाए। यह संदेश दिया गया मंगलवार को कस्बे के तेरापंथ सेवा केन्द्र से और मौका था अणुव्रत अमृत महोत्सव की शुरूआत का। अणुव्रत समिति अध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने बताया कि अणुव्रत की केन्द्रीय संस्था अणुविभा के निर्देशानुसार अणुव्रत अमृत महोत्सव वर्ष की शुरूआत 21 फरवरी को अणुव्रत संदेश रैली से की गई। कस्बे के संस्कार इनोवेटिव स्कूल एवं बाल निकेतन स्कूल के चयनित विद्याार्थियों को शामिल कर यह रैली निकाली गई। रैली तेरापंथ भवन धोलिया नोहरे से शुरू होकर हाई स्कूल रोड, गांधी पार्क, गौरव पथ, पुरानी घास मंडी, रानी बाजार होते हुए तेरापंथ सेवाकेन्द्र पहुंची। यहां केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वीश्री संपूर्णयशा के सानिध्य में अणुव्रत संकल्प सभा का आयोजन किया गया। सभा की शुरूआत अणुव्रत समिति के अणुव्रत अमृत महोत्सव कार्यक्रम के संयोजक विजयराज सेठिया ने अणुव्रत गीत संगान एवं अणुव्रत सिद्धांतों की व्याख्या के साथ की। कांतादेवी बरडिया ने गीत संगान किया एवं महिया मंडल से संगीता देवी बोथरा ने भावाभिव्यक्ति दी। अणुव्रत समिति मंत्री एडवोकेट रणवीरसिंह खीची ने स्थानीय समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। श्रृद्धानिष्ठ श्रावक धनराज पुगलिया ने विचार व्यक्त किए एवं आभार ज्ञापन समिति अध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने किया। संयोजक अमृत महोत्सव सह संयोजक विक्रम मालू ने किया।

अमरता है अणुव्रत-साध्वी डॉ. सम्पूर्ण यशा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अणुव्रत वह सिद्धांत है जिनकी पालना से व्यक्तित्व अमर हो जाता है। आचार्यश्री तुलसी ने आजादी के बाद देश की विकट परिस्थितियों में मानव निर्माण से समाज एवं देश निर्माण के गहरे सूत्र से पूरे देश को एक धागे में पिरोया। आचार्यश्री कालूगणी की जयंती के अवसर पर फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को अणुव्रत का प्रतिपादन स्वयं एवं आचार्य कालूगणी की अमरता को भी और विराट कर दिया। यह प्रवचन तेरापंथ सेवाकेन्द्र की व्यवस्थापिका साध्वी डाक्टर सम्पूर्ण यशा ने अणुव्रत अमृत महोत्सव की शुरूआत कार्यक्रम में दिए। साध्वीश्री ने अणुव्रत आंदोलन को चरित्र प्रधान धर्म बताया एवं यह सभी धर्मों में समान है। उन्होंने कहा कि मानव समाज में दो प्रकार के धर्म है उपासना प्रधान धर्म, जिसमें प्रत्येक सम्प्रदाय की उपासना पद्धति अलग अलग है। दूसरा चरित्र प्रधान धर्म, इसमें सभी धर्मों में समान मान्यतांए है। इसलिए अणुव्रत सभी धर्मों का सार है। साध्वीश्री ने कार्यक्रम में मौजूद शताधिक विद्यार्थियों को अणुव्रत संकल्प एवं प्रतिज्ञाएं करवाई और जीवन में प्रामाणिक रहने की प्रेरणा दी। इससे पूर्व साध्वी मेघयशा ने भी विचार व्यक्त करते हुए युवा विद्यार्थियों को सामान्य जीवन में चरित्रवान बनने को अणुव्रत का पहला कदम बताया एवं नैतिकता से परिपूर्ण जीवन जीने को प्रेरित किया। साध्वीवृंद ने गीत संगान भी किया एवं अणुव्रत के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

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