


श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स, 26 अगस्त 2026। बुधवार शाम राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जिले में मतदान की तिथि में बदलाव किए जाने से श्रीडूंगरगढ़ पालिका क्षेत्र में प्रत्याशियों और मतदाताओं का मानसिक तनाव बढ़ गया है। विशेष रूप से बाबा रामदेव के दर्शनार्थ रवाना होने वाले पैदल यात्री संघों के सामने नई परिस्थितियों में व्यवस्थाएं बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। कस्बे से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा रामदेव के दर्शन के लिए पैदल संघों के रूप में रवाना होते हैं। इस बार भी अधिकांश संघ 6, 7 या 8 सितंबर को रवाना होने की तैयारी में थे। पूर्व में 9 सितंबर को मतदान की तिथि घोषित होने के बाद संघ संचालकों ने अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए मतदान के बाद 9 सितंबर की शाम अथवा 10 सितंबर की सुबह रवाना होने की योजना बनाई थी। अब मतदान तिथि में दोबारा बदलाव होने से इन संघों की पूरी योजनाएं प्रभावित हो गई है।
हजारों मतदाताओं के मतदान से वंचित होने की चिंता
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। संघ संचालकों का कहना है कि पैदल यात्राओं में कस्बे के हजारों लोग शामिल होते हैं। तिथि बदलने से नई तिथि 11 सितंबर यात्रा के दौरान आएगी। यात्राओं में शामिल मतदाता बड़ी संख्या में श्रीडूंगरगढ़ से दूर रहेंगे। ऐसे में उनके लिए मतदान करने वापस आना और पुनः पैदल संघ के साथ जुड़ना व्यवहारिक रूप से मुश्किल होगा। इससे मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
प्रवासी मतदाताओं की भी बढ़ी परेशानी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वहीं, बड़ी संख्या में प्रवासी नागरिकों ने पूर्व निर्धारित 9 सितंबर की मतदान तिथि को ध्यान में रखते हुए अपने आने-जाने के टिकट भी बुक करवा लिए थे। अब तिथि में बदलाव होने से उन्हें अपनी यात्रा योजनाओं में फिर से परिवर्तन करना पड़ेगा। कई प्रवासियों के लिए टिकट बदलना या नई टिकट उपलब्ध कराना भी परेशानी का कारण बन सकता है।
प्रत्याशियों के सामने भी नई चुनौती
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मतदान तिथि में बदलाव का असर चुनाव मैदान में उतरने वाले संभावित प्रत्याशियों की तैयारियों पर भी पड़ रहा है। प्रत्याशी प्रवासी मतदाताओं के मतदान के लिए पहुंचने को लेकर पहले से संपर्क और कार्यक्रम बना रहे थे। अब तिथि बदलने से उनके निर्धारित कार्यक्रम प्रभावित होने तथा प्रवासी मतदाताओं के अपने कार्यक्रम रद्द नहीं करने की आशंका भी बनी हुई है। अचानक तिथि परिवर्तन से क्षेत्र में एकबारगी असमंजस और निराशा का माहौल नजर आ रहा है। अब प्रत्याशियों, संघ संचालकों और मतदाताओं की नजरें आगामी चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हैं और सभी अपनी-अपनी व्यवस्थाओं को नए कार्यक्रम के अनुसार ढालने में जुट गए हैं। वहीं, पदयात्राओं में शामिल होने वाले प्रत्याशियों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन गई है। कई संभावित प्रत्याशी स्वयं पैदल संघों के साथ यात्रा में शामिल होते हैं और इसी अनुरूप उन्होंने अपने चुनावी कार्यक्रम भी तय किए थे। मतदान तिथि में बदलाव से अब उन्हें पदयात्रा और चुनाव प्रचार के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती खड़ी हो गई है। चुनावी तैयारियों के बीच अचानक बदली तिथि ने प्रत्याशियों की रणनीति और कार्यक्रमों को भी प्रभावित किया है।






