






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 जुलाई 2026। क्षेत्र में हो रहे भयावह सड़क हादसे क्षेत्रवासियों को दहला रहें एवं हर हादसे के बाद क्षेत्रवासी मुखर होकर करीब तीन सालों से राजनीतिक कारणों से अटके पड़े ट्रोमा सेंटर निर्माण के आंदोलन को और अधिक बुंलद करते है। गत रविवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य एवं राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के जिलाध्यक्ष हरिराम बाना के नेशनल हाईवे स्थित कार्यालय के सामने ही हुए एक सड़क हादसे में तीन जनों की मौत समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण हो गई। इसके बाद से ही बाना सहित युवा कार्यकर्ता उद्वेलित थे। मंगलवार को बाना ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर क्षेत्र में ट्रोमा निर्माण जल्द से जल्द शुरू करवाने के लिए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। निर्णय के बाद बाना सहित सभी कार्यकर्ता ट्रोमा सेंटर के लिए 647 दिनों से चल रहे धरने पर पहुंचें एवं धरने को अपना सर्मथन दिया। बाना इस सदंर्भ में अपने अपने स्तर पर आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।
धरना देने के बाद बाना सहित कार्यकर्ताओं ने उपखण्ड़ अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। बाना ने बताया कि ज्ञापन में सरकार को क्षेत्र में हो रहे लगातार हादसों की जानकारी देते हुए अब और इंतजार नहीं करने व उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री को राजनैतिक द्वेषता के कारण गत सरकार द्वारा घोषित ट्रोमा का निर्माण रोकने का विरोध जताया गया एवं बाद में उनके स्वयं के द्वारा श्रीडूंगरगढ़ के गांव गुंसाईसर बड़ा में ट्रोमा सेंटर की घोषणा को याद दिलवाया गया है। ज्ञापन देने वालों में बाना, कांग्रेस पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष भगवाननाथ सिद्ध, कांग्रेस जिला महासचिव सोहनलाल महिया, यूथ कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष संतोष गोदारा सहित श्रीडूंगरगढ़ ट्रोमा निर्माण संघर्ष समिति के रामकिशन गावड़िया, प्रकाश मेघवाल, मदनलाल एवं बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे। इससे पूर्व बाना के कार्यालय में आयोजित बैठक में मांगीलाल कुलरिया, तेजपाल सारण, रामनिवास गोदारा, संतोष कुमार, लक्ष्य प्रजापत, गिरधारीलाल, भागीरथ गोदारा, ओमप्रकाश डोगीवाल, बाबूलाल चोटिया, दिनेश कुमार पिलानियां, राजूराम चोटिया, नरेन्द्र धतरवाल, गोपाल तर्ड, शंरकलाल नायक, प्रकाश गोदारा, मोहसीन खान, विकी प्रजापत, रामनिवास गाट, राजेश डेलू, पप्पूराम गोदारा, जैतरूप, राकेश सारण, सुखराम जाखड़, विजयपाल गोदारा, रामलाल नाहर, बीरबलराम सांई, गोल्डन तंवर, डूंगरराम सिंवर, महेन्द्र मोटसरा, बाबूलाल सिंवल, मघाराम मेघवाल, नंदलाल आदि ने आंदोलन के संबध में अपने विचार रखे एवं उग्र आंदोलन से ही सरकार को क्षेत्रवासियों की आवाज सुनाने की बात कही।


