May 23, 2024

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 जून 2021। योग दिवस पर श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र वासियों के मंगल स्वास्थ्य की शुभकामनाओं के साथ आप श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स की विशेष पेशकश स्वास्थ्य समाचार से जुड़ें और भारतीय योग व प्राकृतिक जीवन के छोटे छोटे उपायों को अपना कर परिवार सहित प्रसन्न व संतुष्ट जीवन की ओर अग्रसर हो।
जाने अष्टांग नमस्कार- को करते समय शरीर के कुल आठ अंग भूमि का स्पर्श करते हैं। इसीलिए इस आसन को अष्टांग या आठ अंगों से किया जाने वाला नमस्कार भी कहा जाता है। ये आसन विन्यास शैली का योगासन है, जिसे सूर्य नमस्कार के योगासनों में से एक माना जाता है।

अष्टांग नमस्कार करने की विधि
1.योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
दोनों हाथ कमर के पास सामान्य स्थिति में रहेंगे।
2.हाथों को पसलियों के पास ले आएं।
गहरी सांस बाहर की तरफ छोड़ेंगे।
हथेलियों के बल ऊपर उठने की कोशिश करें।
3.दोनों पैर के पंजे,, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, सीना और ठोड़ी ही जमीन को छूते रहेंगे। अन्य सभी अंग हवा में उठे हुए रहेंगे।
4.हिप्स और और पेट हल्का सा उठा रहेगा।
5.सांस को रोककर रखेंगे।
6.इसके बाद सांस खींचते हुए सामान्य हो जाएंगे।

सावधानियां
1.रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर ये आसन न करें।
2.गंभीर बीमारी होने पर भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
3.गर्दन में दर्द होने पर अष्टांग नमस्कार नहीं करना चाहिए।
4.स्लिप डिस्क के मरीज इस आसन का अभ्यास न करें।
5.कंधे में दर्द की समस्या होने पर हाथ ऊपर न उठाएं।
6.घुटने में दर्द या आर्थराइटिस होने पर दीवार के सहारे ही अभ्यास करें।
7.दिल और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज ये आसन न करें।

अष्टांग नमस्कार करने के फायदे
1.अष्टांग नमस्कार करने से ये अंग स्ट्रेच होते हैं,पैर के अंगूठे,तलवे,हिप्स, लोअर बैक, गर्दन
लोअर बैक और हिप्स के स्ट्रेच होने से ये अंग मजबूत होते हैं, कोर (एब्स), पेट, सीना, घुटना, बाइसेप्स, ट्राईसेप्स।
जब ठोड़ी और चेस्ट / सीना फर्श पर लगे होते हैं, इससे प्रेशर हाथों और कंधों पर आता है। इससे बाईसेप्स और ट्राईसेप्स को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

2.अष्टांग नमस्कार का अभ्यास हालांकि एक बैलेंसिंग पोज है। लेकिन इससे स्पाइन / रीढ़ की हड्डी के आसपास की मांसपेशियों पर शरीर को संतुलन में बनाए रखने का दबाव पड़ता है।
इन मसल्स के स्टिम्युलेशन और एक्टिव इस्तेमाल से पूरी पीठ मजबूत होने लगती है। इसके बाद जब शरीर के आठ प्वाइंट फर्श को छूते हैं, तो स्पाइन के प्राकृतिक मोड़ अपने आप शेप में आने लगते हैं।
3.इस आसन को करने के लिए पेट को भीतर की तरफ खींचना पड़ता है। इससे हिप्स और लोअर बैक को सही शेप और संतुलन में रखने के लिए सपोर्ट मिल पाता है। इसी सजगता से कोर मसल्स को एंगेज रखने में मदद मिलती है। इसके नियमित अभ्यास से नए योगियों को योग की गहराई और बारीकियां सीखने में भी मदद मिलती है।
4. अष्टांग नमस्कार करते समय शरीर को एक सबसे महत्वपूर्ण फायदा ये भी है कि ये दिमाग को स्थिर रखकर आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करता है। जब स्थिरता और आत्मविश्वास एक साथ बढ़ते हैं तो नए योगी ऊर्जावान महसूस करते हैं। इस सकारात्मक ऊर्जा का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों में किया जा सकता है।
5.इस आसन को करते समय पेट को भीतर खींचकर रखना पड़ता है और कोर या एब्स की मसल्स पर दबाव पड़ता है। अष्टांग नमस्कार योग के नियमित अभ्यास से मणिपूरक चक्र को स्टिम्युलेट करने में मदद मिलती है।
जब मणिपूरक चक्र एक्टिव हो जाता है, इससे सभी आंतरिक अंगों को स्टिम्युलेट करने में मदद मिलती है। ये शरीर की पाचन क्रिया को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।

 

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