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October 13, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 अगस्त 2026। मोमासर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में निरंतर जारी है। 3 अगस्त से प्रारंभ हुआ यह धार्मिक आयोजन 12 अगस्त तक चलेगा। कथा वाचन पारीक रामकृष्ण शास्त्री एवं उनकी कांगड़ की संगत मंडली रही है। गुरुवार को कथा के दौरान शास्त्री जी ने संध्या एवं कामदेव के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कामवासना जैसी प्रवृत्ति ने ब्रह्माजी तक को मोह में डाल दिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सांसारिक वासनाएं व्यक्ति को श्रेष्ठ कर्मों से भी विचलित कर सकती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि ब्रह्माजी द्वारा बताए गए जीवन-दर्शन को आत्मसात कर अपने आचरण को संयमित एवं सदाचारपूर्ण बनाएं। कथा में संध्या की तपस्या और उनके अंतिम उपदेश का उल्लेख करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को त्रिकाल संध्या का महत्व समझना चाहिए। यदि तीनों समय—प्रातः, मध्यान्ह और सायंकाल—संध्या करना संभव न हो तो कम से कम दो समय नियमित रूप से संध्या अवश्य करनी चाहिए। शिव मंदिर के पुजारी मंगलनाथ ने बताया कि कथा प्रारंभ होने से पूर्व ठाकुरजी के मंदिर से शिव पुराण ग्रंथ को श्रद्धापूर्वक मस्तक पर धारण कर तुलसाराम शर्मा एवं किशनाराम गोदारा ने डीजे और कलश यात्रा के साथ शिव मंदिर तक पहुंचाया। धार्मिक उल्लास के बीच निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यह आयोजन समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। प्रतिदिन मोमासर सहित कितासर एवं आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।