









श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 27 सितंबर 2026। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से संस्कृति भवन में साहित्यकार समारोह एवं संगोष्ठी आयोजित की गई। ‘कागज से स्क्रीन तक सृजन की दुनिया’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में साहित्य के बदलते माध्यम, तकनीक और संवेदना पर साहित्यकारों ने विचार रखे। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सृजन सम्मान एवं पुरस्कार अर्पित किए गए। समारोह की अध्यक्ष कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डुकवाल ने कहा कि कागज से स्क्रीन तक साहित्य का सफर केवल माध्यम का परिवर्तन नहीं, बल्कि मनुष्य की पढ़ने और सोचने की आदतों में आया बदलाव भी है। तकनीक ने शब्दों को गति और विस्तार दिया है, लेकिन साहित्य की वास्तविक शक्ति उसकी संवेदना और ठहराव में है। उन्होंने कहा कि स्क्रीन की तेज रोशनी अंतर्दृष्टि को धुंधला न करे और सूचना के शोर में साहित्य की आवाज दबने नहीं दी जानी चाहिए। मुख्य अतिथि जैन विश्व भारती संस्थान, लाडनूं के कुलपति प्रो. बच्छराज दुगड़ ने कहा कि माध्यम चाहे कागज हो या स्क्रीन, सृजन की अंतिम कसौटी यह है कि वह मनुष्य को भीतर से कितना छू पाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता शब्दों को सजा सकती है, लेकिन किसी अनुभव की धड़कन मनुष्य ही दे सकता है। मुख्य वक्ता डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने कहा कि तकनीक के प्रसार से रचना और कला के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है। रचनाकारों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके नकारात्मक प्रभावों से लेखन को बचाना होगा, तभी संवेदनशील एवं संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि चुनौती शब्दों को अधिक लोगों तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन्हें पाठक तक इतनी गहराई से पहुंचाने की है कि वह कुछ क्षण ठहरकर स्वयं से संवाद कर सके। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि माध्यम बदलने के बावजूद शब्दों के मन तक पहुंचने की दूरी आज भी उतनी ही है। संस्था सचिव साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि सृजन का असली घर न कागज है और न स्क्रीन, बल्कि मनुष्य का मन है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुकांत ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि कागज बचेगा या स्क्रीन, बल्कि यह है कि शब्दों की आत्मा बची रहे। समारोह का संचालन कवयित्री भगवती पारीक ‘मनु’ ने किया।
इनका सम्मान किया, ये हुए शामिल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। समारोह में मधुकांत, रोहतक को मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान, डॉ. सूरजसिंह नेगी, जयपुर को डॉ. नन्दलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार, डी.पी. पचीसिया, बीकानेर को रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान, मीरा जैन, उज्जैन को शिवप्रसाद सिखवाल स्मृति महिला लेखन पुरस्कार, डॉ. सतीश कुमार, किशनगढ़ को सुरेश कंचन ओझा लेखन पुरस्कार, अरविंद पथिक, गाजियाबाद को श्री चन्द्रमोहन हाड़ा हिमकर स्मृति उपन्यास लेखन पुरस्कार तथा लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, बस्ती को श्याम सुन्दर नागला स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में महावीर माली, विजय महर्षि, भवानी-कांति उपाध्याय, विनोद सिखवाल, पंकज बिंदिया ओझा, प्रशांत बिस्सा, रामचन्द्र राठी, बजरंग शर्मा, मदन सैनी, महावीर सारस्वत, डॉ. चेतन स्वामी, भरतसिंह राठौड़, मनमोहन कल्याणी, ओम गुरावा, गोपीराम नाई, डॉ. विनोद सुथार, नगरपालिका उपाध्यक्ष विनोद गिरी गुसाईं, सत्यनारायण योगी, दयाशंकर शर्मा, अम्बिका डागा, रेणु प्रजापत, तमन्ना झाबक, मधु झाबक, पूर्व पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, गिरधारी सिंधी, विमल भाटी सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं संभागी मौजूद रहे।










