


श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 सितम्बर 2026। नगरपालिका चुनाव-2026 का मतदान संपन्न होने के बाद हर किसी का ध्यान एक्जिट पोल की और है लेकिन इस बार के चुनावों में एक्जिट पोल तो क्या राजनैतिक दल भी अपने दावे तक स्पष्ट रूप से नहीं कर पा रहे है। चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों से लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों तक, सभी की नजरें अब मतगणना पर टिकी हैं। लेकिन इस बार मुखर विरोध के बाद भी मतदाताओं की साइलेंट वोटिंग ने चुनावी समीकरणों को इस कदर उलझा दिया है कि न तो कोई दल खुलकर जीत का जश्न मना पा रहा है और न ही हार का दुःख स्वीकार कर रहा है। मतदान के बाद भी सीटों का आंकड़ा नहीं निकल रहा और हर वार्ड का गणित अपने-अपने दावों में उलझा हुआ है।
जीत का भरोसा अधूरा
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों ने अपने-अपने पक्ष में माहौल होने के दावे किए थे। समर्थकों ने भी जीत के आंकड़े गिनाए, लेकिन मतदान के बाद मतदाताओं की चुप्पी ने सारे दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किस वार्ड में किसका पलड़ा भारी रहा, किस प्रत्याशी को भीतर ही भीतर समर्थन मिला और कहां वोटों का रुख बदला, इसका स्पष्ट अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी परिणाम से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं।
हर सीट पर उलझा गणित, दलों की बढ़ी बेचैनी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नगरपालिका चुनाव में इस बार किसी भी दल को स्प्ष्ट बहुमत नहीं मिलता दिख रहा। ऐसे में एक-एक सीट बोर्ड गठन के लिए अहम हो सकती है। इस बार स्प्ष्ट जीत पूरे शहर में केवल दो-तीन वार्डों में ही लग रही है एवं अधिकांश सीटों पर मामला करीबी ही रहेगा।
बोर्ड गठन की जंग में निर्दलीयों की अहम भूमिका
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस बार चुनाव परिणाम में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता नजर आ रहा है तो ऐसे में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक रहेगी। यही संभावना राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र बन गई है। संभावित निर्दलीयों से परिणाम से पहले ही संपर्क, समर्थन जुटाने और बोर्ड गठन के लिए जरूरी संख्या का प्रबंध करने की तैयारियां शुरू होने की चर्चा है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी सिर्फ वार्ड की जीत तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नगरपालिका की सत्ता के समीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शुरू हुआ ऑपरेशन निर्दलीय।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मतगणना से पहले ही राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन निर्दलीय’ की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। पार्टियां संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए निर्दलीय प्रत्याशियों के रुख और उनके समर्थन की संभावनाओं पर नजर रख रही हैं। कौन किसके साथ जाएगा, किसे समर्थन मिलेगा और बोर्ड गठन में किस दल की रणनीति कामयाब होगी, इन सवालों के जवाब परिणाम आने के बाद ही सामने आएंगे। संभावित निर्दलीयों से सम्पर्क साधा जा रहा है एवं अपने अपने पक्ष में करने के प्रयास भी जारी हो गए है।
मजबुरी का नाम बना बाडेबंदी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पार्षद चुनावों के बाद बाड़ेबंदी करना राजनैतिक पार्टीयों की एवं संभावित पालिकाध्यक्ष प्रत्याशी की मजबूरी हो गया है और भाजपा व कांग्रेस के साथ साथ विकास मंच के प्रत्याशियों की भी बाड़ेबंदी शुक्रवार को मतदान के तुरंत बाद शुरू हो गई। राजनैतिक हालात तो इस कदर हो गए है कि बाड़ेबंदी नहीं करने की बात करने वाले विकास मंच के बैनर तले निर्दलीयों को भी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। उनके जीत के संभावित प्रत्याशियों पर दोनो दलों की नजरे थी एवं उन्हें अपने पक्ष में उठाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद के प्रयास शुरू हो गए थे एवं ऐसे में अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने एवं परेशानियों से बचाने के लिए विकास मंच को भी अपनी बाड़ेबंदी करनी पड़ी है।






