







श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 जून 2026। ज्येष्ठ अधिक मास की आज सोमवती अमावस्या है। ऐसा दुर्लभ और शुभ संयोग 30 साल बाद आया है। जिससे इसका धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व अनेक गुना बढ़ जाता है। सनातन परंपरा में अमावस, सोमवार और अधिक मास मीनों का अपना विशिष्ट महतव है।
वैदिक धर्म के जानकार बताते है कि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिवस माना जाता है और अमावस्या पितरों के निमित्त समर्पित तिथि है। इस दिन श्रद्धापूर्वक स्नान, दान, पितृ तर्पण तथा भगवान शिव और विष्णु की उपासन करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
अमावस्या तिथि पर सूर्य (आत्मा) और चंद्र (मन) एकाकार हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य आत्मा, चेतना और दिव्य प्रकाश का प्रतीक है, जबकि चंद्र मन, भावनाओं और चचंलता क प्रतिनिधित्व करता है। जब अमावस्य पर सूर्य और चंद्र एक ही बिंदु पर स्थित होते हैं, तब मन की चंचलता अपेक्षाकृत शांत होती है और व्यक्ति अपनी आत्मा की प्रेरणा के अनुरूप चिंतन एवं कर्म करने में सक्षम होता है।
आज किए गए मंत्रजाप, ध्यान गायत्री साधना, महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान, गीता एवं विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। पितृदोष शाति, ग्रहों की अनुकूलता तथा मानसिक संतुलन के लिए भी यह समय अन्यंत शुभ माना जाता है।



