श्रीडूंगरगढ़ के उभरते युवा साहित्यकार की पुस्तक मिल रही है अमेजन पर, पढें पूरी खबर।




श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 अक्टूबर 2022। रोता देख लोग हंसने लगते है आज, बेबसी को संभालता है कौन.., अगर इश्क है तो जताती क्यों नहीं हो..? सरीखी कविताओं का संग्रह है हमारे शहर के युवा साहित्यकार एडवोकेट मनोज नाई का “मेरी कलम, मेरी दास्तां” पुस्तक को पब्लिश किया प्रतिष्ठित ब्लू हिल पब्लिकेशनस ने और पुस्तक अब अमेजन पर भी उपलब्ध है। पढ़ने लिखने के शौकिन लोग पुस्तक को अमेजन से मंगवा रहें है और कविताओं के रूप में अपनी संवेदनाए लिखने की घोषणा मनोज स्वंय पुस्तक में करते है। पुस्तक का श्रीडूंगरगढ़ में विमोचन श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स व श्रीकरणी हैरिटेज रिसोर्ट द्वारा आयोजित द ग्रेट डांडिया महोत्सव के मंच से 29 सितंबर को किया गया है। मनोज कहते है न तो “मैं शायर हूं, ना ही कोई कवि, ना तो मेरा शायरों से, दूर दूर का वास्ता है, ना ही किसी तरह की कविता से। बस एक आदत सी हो गई है, तुझे लिखने की, तेरे लिए ही लिखने की, तेरी यादों को लिखने की..” कहीं वे कहते है “ काश एक दिन ऐसा हो तुम कहती रहो, मैं सुनता रहूं..”। उनका कवि ह्रदय नारी को समानता के अधिकार देता है और बेटी को पराया धन कहने का विरोध भी करता है। वे कहते है “पूजे कई देव तो मैंने मिष्टी मिश्री को पाया, क्यों कहते हो बेटी को धन पराया..”। वे नारी द्वारा ससुराल छोड़ने पर समाज द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार पर रोष प्रकट करते है और कहते है “घर छोड़ने वाली का लेबल लगा दिया जाता है..”। पुस्तक में उन्होंने आत्महत्या, भाई के प्रेम पर दिल को छुने वाली कविता लिखी है। उनका कवि ह्रदय कहता है कि “क्या चल सकोगे कुछ दूर मेरे कुछ नहीं बनकर..” कहीं वे दुनिया के लिए कहते है “लोग जल जाते है मेरी मुस्कान से क्योंकि मैंने दर्द की नुमाइश नहीं की..”।उम्र के बंधन को नकारते हुए जीवन को सकारात्मक रूप से जीने की कला को उनका कवि मन कहता है कि “जन्म से मृत्यु तक हर कोई भरना चाहता है सपनों की उड़ान..”। ऐसी ही अनेक कविताओं का संग्रह है मनोज का मेरी कलम मेरी दास्तां।
कवि परिचय- मनोज बताते है कि उनका जन्म 1991 में हुआ और पिता खुशीराम बचपन में ही संसार से विदा हो गए। माता गुलाबदेवी ने अनेक संघर्षों से पाला और कठोर अनुशासन का पाठ पढाया। कच्ची उम्र में ही ऊषा से विवाह हुआ और दो बेटियां मिष्टी व मिश्री जीवन में आई। वकालत के साथ वे आजकल राजनीति और लेखन में रूचि लेते है और भगवान भैंरूनाथ का इष्ट है। अपने पापा से प्रेरणा लेकर उन्होंने ये कविताएं लिखी है और लेखन में आगे बढ़ना लक्ष्य है। बता देवें उनके रिश्तेदारों व मित्रों ने पुस्तक के विमोचन पर उन्हें बधाई देते हुए निरंतर आगे बढने की शुभकामनाएं दी है।