July 14, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 जुलाई 2026। मंलगवार सुबह गांव बापेऊ में राउमावि के बाहर तीन घंटे जमकर हंगामा हुआ और बच्चों के साथ उनकी पढ़ाई के लिए चिंतित उनके अभिभावकों, ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। सुबह सात बजे से दस बजे तक धरना रहा व उसके बाद समझाईश व आश्वासन से मामला सुलझा। सवा दस बजे स्कूल के ताले खोले गए और स्टाफ व बच्चों ने स्कूल में प्रवेश किया।

श्रीडूंगरगढ़ अंचल में 37 गांवो के 45 स्कूलों में 237 कक्षाकक्ष, दो पूरे स्कूल भवन, शौचालय, पानी की टंकिया गिराने के आदेश शिक्षा विभाग द्वारा 9 जुलाई को जारी किए गए। विभाग ने बच्चे कहां बैठेंगे और कैसे पढ़ेंगे.? के बारे में कोई योजना या प्लान बी नहीं बनाया और आनन फानन में कमरे ध्वस्त करने रिपोर्ट बना डाली। जो कमरे जर्जर नहीं है उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया है। क्षेत्र के कई स्कूलों से ये शिकायत विभाग को प्राप्त हुई है। मंगलवार को गांव बापेऊ में परेशान बच्चे व अभिभावकों के सब्र का बांध टूट गया और सभी ने स्कूल गेट पर ताला जड़ दिया। सुबह सात बजे जब प्रधानाचार्य अनुल मिश्र व स्टाफ पहुंचे तो विद्यार्थियों ने जमकर नारेबाजी की। यहां ब्लॉक कार्यालय से आरपी कुंभाराम चौधरी मौके पर पहुंचे और बच्चों व अभिभावकों से समझाईश कर तीन घंटे बाद ताला खुलवाया गया। तब स्टाफ ने स्कूल में प्रवेश किया।

ये रखी मांगे, अधिकारी ने दिया आश्वासन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अभिभावकों ने शिक्षण के लिए उचित प्रबंध करने की मांग की। अभिभावकों ने बताया कि पहली से बाहरवीं तक के इस राउमावि में मात्र 7 कक्ष है जो बच्चों के बैठने के लिए खुले है, विद्यालय में ग्यारहवीं व बाहरवीं के कला व विज्ञान दो संकाय है, 500 से अधिक बच्चे है, बच्चे बाहर खुले में बैठ रहें है, गणित की शिक्षिका बीकानेर डेपूटेशन पर है, भौतिक विज्ञान व एक वरिष्ठ अध्यापक का तबादला हो जाने से पहले ही शिक्षकों की चल रही कमी बढ़ गई है। अभिभावकों ने बताया कि 29 जुन को स्कूल में आई सर्वे टीम ने 7 के अलावा बने चार कमरे जर्जर घोषित कर दिए, जिनमें से दो सही स्थिति में है, और ऐसे में सर्वे दुबारा करवाया जाए। ग्रामीणों ने दो जर्जर को गिराने व दो कमरे जिनका 2018 में पुर्ननिर्माण हुआ का सर्वे डंर लड़ने ज। ग्रामीणों ने एकस्वर में कक्षा 1 से 5 तक व 11वीं 12वीं की कक्षाओं को हरगिज बाहर नहीं बिठाने की मांग की। इस पर प्रधानाचार्य व आरपी ने छोटे व बड़े बच्चों को बाहर नहीं बिठाने, गणित की शिक्षिका का डेपुटेशन रद्द करवाने व सर्वे टीम द्वारा दुबारा सर्वे करवाए जाने का आश्वासन दिया। आखिरकार तीन घंटे चले हंगामे के बाद स्कूल खुला और करीब 10 बजे बाद स्कूल में विद्यार्थी व स्टाफ प्रवेश हुए।
बच्चों को बिठाने के लिए कोई तो व्यवस्था की जाए।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अभिभावकों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बच्चे बाहर खुले में बैठकर पढ़ रहें है। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की कमी, आमने सामने कक्षाएं होने से बच्चों का अध्ययन नहीं हो रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रभुनाथ ने बताया कि स्थिति चिंताजनक है, दो सही स्थिति में जो कक्ष है उनका दुबारा सर्वे करवाया जावें। ग्रामीण भी मरम्मत करवाने के लिए सहयोग पर चर्चा कर रहें है, वहीं नए कक्ष के लिए जनप्रतिनिधियों से मांग की जाएगी। समिति में विचार विर्मश जारी है। सरकार व विभाग भी इस संबंध में ठोस निर्णय लेते हुए कोई कदम उठाए अन्यथा शिक्षण चौपट हो जाएगा।

टाइम्स ने उठाया था मुद्दा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 9 जुलाई के आदेश के बाद श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स ने इस समस्या पर व्यापक रूप से आवाज उठाते हुए पूरी रिपोर्ट का प्रकाशन किया था। विभाग द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था के बगैर आनन फानन में निर्णय लिया गया। वहीं अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि असुरक्षित व नाकारा कक्षाओं में तो बच्चों को हरगिज नहीं बिठाया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता संभव नहीं है। वहीं बच्चों के बैठने व कैसे पढ़ेगें के सवाल पर भी तो विचार किया जाना चाहिए।