June 15, 2026
15-june

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 जून 2026। आज है सोमवती अमावस्या और अधिकमास का अंतिम दिन, खुल कर करें गोसेवा कर धार्मिक कार्य। पढें आज का पंचांग, जानें दिन भर का समय-चौघडिया पंडित विष्णुदत्त शास्त्री के साथ।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀ 15-Jun-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि अमावस्या, प्रतिपदा 08:26 AM
🔅 नक्षत्र मृगशिरा 07:09 PM
🔅 करण नाग, किन्स्तुघ्ना 08:26 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग शूल, गण्ड 08:55 AM
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:36 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि वृषभ 08:41 AM
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 07:31 PM
🔅 चन्द्रास्त 08:08 PM
🔅 ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 13:54:55
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत ज्येष्ठ (अधिक)
🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ (अधिक)
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:06 PM 01:02 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 01:02 PM 01:57 PM
🔅 कंटक 08:23 AM 09:19 AM
🔅 यमघण्ट 12:06 PM 01:02 PM
🔅 राहु काल 07:21 AM 09:05 AM
🔅 कुलिक 03:49 PM 04:44 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 10:15 AM 11:10 AM
🔅 यमगण्ड 10:49 AM 12:34 PM
🔅 गुलिक काल 02:18 PM 04:03 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 अमृत 05:37 AM – 07:21 AM
🔅 काल 07:21 AM – 09:05 AM
🔅 शुभ 09:05 AM – 10:50 AM
🔅 रोग 10:50 AM – 12:34 PM
🔅 उद्वेग 12:34 PM – 02:18 PM
🔅 चल 02:18 PM – 04:03 PM
🔅 लाभ 04:03 PM – 05:47 PM
🔅 अमृत 05:47 PM – 07:31 PM
🔅 चल 07:31 PM – 08:47 PM
🔅 रोग 08:47 PM – 10:03 PM
🔅 काल 10:03 PM – 11:18 PM
🔅 लाभ 11:18 PM – 00:34 AM
🔅 उद्वेग 00:34 AM – 01:50 AM
🔅 शुभ 01:50 AM – 03:05 AM
🔅 अमृत 03:05 AM – 04:21 AM
🔅 चल 04:21 AM – 05:37 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 03:45 AM समाप्त: 05:41 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:41 AM समाप्त: 07:56 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 07:56 AM समाप्त: 10:16 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 10:16 AM समाप्त: 12:33 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 12:33 PM समाप्त: 02:49 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 02:49 PM समाप्त: 05:09 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 05:09 PM समाप्त: 07:27 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 07:27 PM समाप्त: 09:32 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 09:32 PM समाप्त: 11:15 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 11:15 PM समाप्त: 00:43 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 00:43 AM समाप्त: 02:09 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 02:09 AM समाप्त: 03:45 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

🌼 सोमवती अमावस्या
अधिक मास की अमावस्या, सोमवती अमावस्या है, अधिक मास की अमावस्या 3 वर्ष में एक बार आती है और सोमवार को होने के कारण इसका महत्त्व और भी अधिक बढ़ गया है, अधिक माह में सोमवती अमावस्या का संयोग 30 वर्षो के बाद आया है । अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव को माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने धर्मराज युधिष्ठिर जी को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान करने, जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने वाला मनुष्य स्वस्थ्य, समृद्धशाली होगा, उसे कोई भी दुःख नहीं सतायेंगे ।
पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। इस दिन प्रात: काल पीपल की सेवा करने, पीपल को दूध, काले तिल मिश्रित मीठे जल से सींचने, “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप करते हुए पीपल की परिक्रमा करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है की इस दिन जो स्त्री तुलसी जी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर उसे अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है ।जिन जातकों की जन्मपत्रिका में घातक कालसर्प दोष है, वे लोग यदि सोमवती अमवस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा करके उन्हे शिवलिंग पर चढ़ाएं अथवा नदीं में प्रवाहित कर दें तो उन्हें निश्चित ही काल सर्प दोष में राहत मिलती है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री