






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 जुलाई 2026। बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में जहां हरियाली को बचाने की चिंता लगातार बढ़ रही है, वहीं श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के जैतासर गांव के युवाओं ने अपने श्रम, संकल्प और सामूहिक प्रयास से एक ऐसी प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है, जो पूरे क्षेत्र के लिए अनुकरणीय बन गई है। गांव का मोक्ष धाम अब केवल अंतिम संस्कार का स्थल नहीं, बल्कि हरियाली, सेवा और सामाजिक जागरूकता का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है।
कुछ समय पहले तक वीरान नजर आने वाले मोक्ष धाम में आज अनेक पेड़ पौधे लहलहा रहे हैं। इन पौधों को केवल लगाया ही नहीं गया, बल्कि उनकी नियमित सिंचाई, देखरेख, सुरक्षा और साफ-सफाई का जिम्मा भी गांव के युवाओं ने स्वयं संभाला। लगातार किए जा रहे श्रमदान का परिणाम है कि हरियाली की यह छांव आने वाले वर्षों में पूरे गांव के लिए प्राकृतिक ‘ऑक्सीजन बैंक’ का स्वरूप धारण करेगी।
ग्रामीण गोपालराम कायल बताते हैं कि युवाओं की मेहनत, धैर्य और समर्पण ने इस स्थान की तस्वीर बदल दी है। अब यहां विकसित हो रही हरियाली गांव के पर्यावरण को संवारने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक अमूल्य धरोहर बनेगी। बुजुर्ग ग्रामीण भी युवाओं की इस सेवा भावना की मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं।
इस अभियान में गोपालराम कायल, कानाराम शर्मा, लालचंद गोदारा, ब्रजलाल शर्मा, छगन शर्मा, दीनदयाल जाखड़, गणेश ड्राइवर, गोविंद गोदारा, परमेश्वरदास स्वामी, गजानंद शर्मा, रामप्रताप महिया, पूनमचंद, गोपीचंद, संतलाल शर्मा, प्रभुराम सहित अनेक युवा प्रतिदिन श्रमदान कर पौधों की देखभाल में जुटे हैं। सामाजिक उत्तरदायित्व का ये भाव गांव की नई पहचान बनता जा रहा है।
युवाओं का स्पष्ट संदेश है कि हरियाली केवल सरकारी योजनाओं और कागजी आंकड़ों से नहीं बढ़ती। पेड़ तभी फलते-फूलते हैं जब समाज स्वयं उन्हें अपना दायित्व मानकर लगाए और उनका संरक्षण करे। उन्होंने क्षेत्र के सभी युवाओं से अपने गांव, घर, खेत और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया है।









