







श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जून 2026। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के लाखों निवासी अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल ओर निर्भर है। लेकिन इन दिनों हालात यह बन गए है कि यहां स्वास्थ्य सेवाएं खुद उपचार की मोहताज नजर आ रही हैं। अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले तैनाती ही कम होने, पद रिक्त होने से क्षेत्रवासी परेशानियां झेलते है। ओर ऐसे में कोढ़ में खाज का काम जो तैनात है उन चिकित्सकों की छुट्टी, ओटी, मीटिंग्स, वीसी आदि कर रही है। शुक्रवार को भी हॉस्पिटल के हालात खराब दिखे। जहां 700 से ज्यादा ओपीडी मरीजों को देखने के लिए 7 चिकित्सक भी सीट पर नही मिले। लंबी लाइनों में इंतजार कर निजी हॉस्पिटल का रुख करने के लिए मजबूर रोगियों की सूचना पर टाइम्स टीम हॉस्पिटल पहुंची तो चिकित्सालय में डॉक्टरों के सीट पर नही मिलने की बीमारी सामने आई।
28 पदों में 11 ही तैनात, उनमें भी 4 अवकाश पर, 1 वीसी में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ हॉस्पिटल में चिकित्सकों के कुल स्वीकृत 28 पद हैं। लेकिन वर्तमान में केवल 11 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं। इन 11 में भी शुक्रवार को महज 7 चिकित्सक ही ड्यूटी पर रहे। दो डॉक्टर डे-ऑफ पर है, एक अवकाश पर और एक सीएल पर होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई । हॉस्पिटल में सुबह से ही पर्ची काउंटर और डॉक्टरों के कमरों के बाहर लंबी कतारें लगी रही। और सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उठानी पड़ी। लोगो को मजबूर होकर निजी हॉस्पिटल जाना पड़ा व प्रति रोगी सैंकड़ो रुपये बेवजह ही खर्च करने पड़े।
जांचे करवाना, दवाई लेना ओर ज्यादा मुश्किल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ अस्पताल में रोगियों की दिक्कतें केवल डॉक्टर को दिखाने तक सीमित नही है बल्कि घंटो लाइन में लगने के बाद डॉक्टर से परामर्श लेने से तो दिक्कतें शुरू होती है। यहां डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली विभिन्न जांचे करवाना भी बेहद मुश्किल है। लेबोरेट्री में जांच सेवाएं भी दोपहर 12 बजे तक ही उपलब्ध हो पाती हैं। ऐसे में दूर-दराज से देर से पहुंचने वाले मरीजों को बिना जांच के ही वापस लौटना पड़ता है या फिर अगले दिन आने को मजबूर होना पड़ता है। इसी प्रकार दवा केंद्रों की कमी व संचालित दवा केंद्रों में भी कार्मिकों की आये दिन अनुपस्थिति के कारण दवा लेना भी बेहद मुश्किल हो गया है।
ओपीडी टाईम में मीटिंग्स, वीसी, ओटी आखिर कब तक..?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती भीड़ के बीच ओपीडी समय में चिकित्सकों और प्रभारी अधिकारियों की मीटिंग्स तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) भी व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बन रही है। मरीजों का कहना है कि जिस समय डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, उसी दौरान प्रशासनिक बैठकों में समय व्यतीत होने से उपचार की गति प्रभावित होती है और कतारों में इंतजार कर रहे मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। सवाल यह है कि जब पहले से ही चिकित्सकों की कमी है और प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, तब ओपीडी समय में होने वाली मीटिंग्स और वीसी का सिलसिला आखिर कब तक मरीजों पर भारी पड़ता रहेगा? इसी प्रकार हॉस्पिटल में होने वाले ऑपरेशन भी ओपीडी समय मे होने के कारण कई चिकित्सक उधर व्यस्त हो जाते है व ओपीडी मरीजों के प्रति किसी की कोई जवाबदेही नही नजर आ रही।




